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कहने लगा चाँद जबसे

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कहने लगा चाँद जबसे, चितचोर हमको, शरमाते हुए देखते हैं,सारे  चकोर हमको। कभी लगता नहीं था कहीं,जो उदास मन,   अब  रमने को कहता है, चहुँ ओर हमको।  बदरी ये चाहत की जबसे, छाई है मन में,   तेरी प्रीत की बारिश,करे सराबोर हमको।   परेशां होने न देता,अब गम के दरिया में,  तेरी मौजों का दिल नशीं, ये शोर हमको।  लिखने लगे है तबसे खुद तकदीर अपनी,   मिला महबूब का जबसे, यह ठौर हमको।   अब डगमगा न पाएगी, कभी प्रेम पथ से,  काली अंधियारी घटा भी, घनघोर हमको।  तेरी कश्ती से, है दरिया के हमें पार जाना,  कहे 'परचेत' मतवाला ये, मनमोर हमको।   

सच में , दुनिया देखिये कितनी छोटी हो गई !

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कल अमेरिकी न्यूज़ एजेंसी सीएनएन की वेब-साईट  पर यह रोचक खबर पढी थी, सोचा अपने ब्लॉग पर भी क्यों न इसे शेयर किया जाए। होली का पर्व होने  की वजह से तुरंत इस सम्बन्ध में लिख नहीं पाया था, सो आज यहाँ शेयर कर रहा हूँ ;  खबर यह थी कि  हवाई में गुम हुआ कैमरा  ताइवान में मिला।  हवाई द्वीप अमेरिका का प्रशांत महासागर के मध्य में स्थित एक प्रान्त है। यह अमेरिका का अकेला द्वीप है जो पूरी तरह द्वीपों से ही बना हुआ है और हवाई द्वीप समूह के अधिकांश द्वीप इसी प्रांत में सम्मिलित हैं। हवाई के आठ मुख्य द्वीप हैं, जो उत्तरपश्चिम से दक्षिणपूर्व में एक पंक्ति पर बिछे हैं। इन आठ द्वीपों के नाम हैं (उत्तरपश्चिम से शुरू होते हुए) - निइहाऊ, काउआइ, ओआहू, मोलोकाइ, लानाइ, काहोओलावे, माउइ और हवाई। इनमें हवाई का द्वीप सबसे बड़ा है।   कुछ ही ऐसे भाग्यशाली लोग होते है जिन्हें अपनी यात्रा के दौरान गुम  हुई कोई प्रिय वस्तु  पुन: वापस मिलने का सौभाग्य प्राप्त होता है। और ऐसी ही एक भाग्यशाली पर्यटक ह...

अबके इस होली में !

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अपनी "छवि" बदलनी चाही, अबके हमने इस होली में,    श्वेत-वसन स्व: अंग चढ़ाकर, अबीर, गुलाल,  रंग लगाकर, निकले घर से  टोली में।  PLANNING FOR HITTING THE STREET ! नज़ारे   उत्सव पर बड़े-बड़े थे,  पिचकारी लेकर चाँद खड़े थे, ना-नुकूर के खेल-खेल में  मल दिया गुलाल ठिठोली में।  SWEET TREATS :) फिर ऐसा  चढ़ा  रंग होली का ,  हाथ बढ़ा हमजोली का , कुछ लहंगे में थिरके तो,  कुछ थिरके फिर चोली में। STATUTORY WARNING: DRINKING IS INJURIOUS TO HEALTH   हसीं ख़्वाबों को संग में लेके, फिर रंग-बिरंगे सपने देखे, आँख खुली  देखा सूरज  छुपता घर की खोली में।        अपनी "छवि" बदलनी चाही, अबके हमने  इस होली में।   मगर अफसोस कि बदल नहीं पाए   AND FINALLY; BEATING THE RETREAT !! :) :)

गोदियाल ढाबा !

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हुए प्यार में तेरे दिवाने ऐसे, सड़क पर ही आ गए हम,अरे बाबा, उधार का खिलाते कब तक तुमको, इसलिए खुद ही खोल दिया ढाबा ! अब बना-बनाके पकवान अनेकों,  इतना खिलाएंगे तुमको,  जो तूम भी बोल उठो;    तेरे ढाबे का खा के, मैं बदरंग हो गई,   कल चोली सिलाई आज तंग हो गई,  और हम बोलेंगे;, कुड़ी के नखरे, ओए शाबा, ओए शाबा !!   

बिन पानी सब सून !

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याद आएगी शनै:- शनै:,  सबको  अपनी नानी, जब न दूध का दूध होगा,  न पानी का पानी।  यूं  तो अभी भी ये  कहाँ हो रहा,किंतु  विकल्प हैं, तब की सोचो,  जब न दूध ही होगा और न पानी।  कि मसला-ऐ-नीर है,  और मसला बड़ा  गंभीर है,   उपाय ढूढिये यथार्थपूर्ण, बंद करो  जंग ज़ुबानी।   हम और तुमने तो  खा-पी लिया खुदगर्जों,  ज़रा सोचोकिसके लिए  पैदा कर रहे हम परेशानी। छवि गूगल से साभार !

कार्टून कुछ बोलता है- कैसे नहीं चलेगी सरकार ?

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"ये कैदे बामशक्कत, जो तूने की अता है"

   बसर हो रही कहाँ,कैसे,तुझको सब पता है, ये कैदे बामशक्कत, जो  तूने की  अता है।   माना कि दूर बहुत है, मगर अंजान नहीं तू, देख सब कुछ रहा,सिर्फ नजरों से लापता है।  हथिया लिया यहाँ पे, ठग,चोरों ने सिंहासन, कुछ पर केस चल रहा, कुछ सजायाफ्ता हैं।      नारी की अस्मिता यहाँ,खतरे से खाली नहीं,  दरिन्दे दिखा रहे सरेराह,क़ानून को धता है।  पता नहीं क्या हुआ, आदमी को इस देश के, गद्दार,नमकहराम फल-फूल रहे अलबता हैं।