...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
यही दर तो साथ देने पर मजबूर करता है ॥सब एक ही थैले के चट्टे बट्टे हैं ।
मैं तुझे डराऊं, तू मुझे डरायेजिसकी बारी आये, दांव दे जायेईमानदार राजनेता हैं हम तो ताऊकभी अपनों को दगा नही देते भाऊरामराम
छापा करुना पर पड़ा, ममता थी निर्दोष । महाठगिन माया ठगी, हृदय मुलायम तोष । हृदय मुलायम तोष, बड़ा मोहन मन सच्चा । छोड़ हमें जो जाय, उड़ा देते परखच्चा । सी बी आय संकेत, खो रही सत्ता आपा । टला बहुत स्टालिन, आज पड़ जाता छापा ॥
लोग पहले से समझते ही नहीं हैं..
बढ़िया है ,महोदय.... साभार...
साथ तो छोड़ना ही नही चाहिए
ये तो होना ही था ...सी बी आई मेरी जेब में जो रहती है ...
तुझे न पा सकने का मुझे मलाल तो था, क्यों न पा सका, दिल मे ये सवाल तो था, न पा सकने की चाहे वजह कोई भी रही हो, वो पल था,दिन था,महिना था औ...
यही दर तो साथ देने पर मजबूर करता है ॥सब एक ही थैले के चट्टे बट्टे हैं ।
ReplyDeleteमैं तुझे डराऊं, तू मुझे डराये
ReplyDeleteजिसकी बारी आये, दांव दे जाये
ईमानदार राजनेता हैं हम तो ताऊ
कभी अपनों को दगा नही देते भाऊ
रामराम
छापा करुना पर पड़ा, ममता थी निर्दोष ।
ReplyDeleteमहाठगिन माया ठगी, हृदय मुलायम तोष ।
हृदय मुलायम तोष, बड़ा मोहन मन सच्चा ।
छोड़ हमें जो जाय, उड़ा देते परखच्चा ।
सी बी आय संकेत, खो रही सत्ता आपा ।
टला बहुत स्टालिन, आज पड़ जाता छापा ॥
लोग पहले से समझते ही नहीं हैं..
ReplyDeleteबढ़िया है ,महोदय....
ReplyDeleteसाभार...
साथ तो छोड़ना ही नही चाहिए
ReplyDeleteये तो होना ही था ...
ReplyDeleteसी बी आई मेरी जेब में जो रहती है ...