...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
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वज़ह!
गर तुम न खरीददार होते, यकीन मानिए, टके-दो-टके में भला कौन बिकता? मुहब्बत बिकाऊ न है और न थी कभी, बस, निवेश गलत किया है तुमने, इसीलिए घर मे...
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ये दिल निसार करके जाना कि राहे जफा होते है लोग, सच में, हमें मालूम न था कि यूं भी बावफा होते है लोग ! सोचते थे कि नेमत है खुदा की य...
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नोट: फिलहाल टिप्पणी सुविधा मौजूद है! मुझे किसी धर्म विशेष पर उंगली उठाने का शौक तो नहीं था, मगर क्या करे, इन्होने उकसा दिया और मजबूर कर द...
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तमाम जंगल के बीहड़ों में जो कुछ घटित हो रहा हो, उससे क्या उस जंगल का राजा अंविज्ञ रह सकता है? या फिर यूं कहा जाए कि यदि उसे उसके राज्य मे...

यही दर तो साथ देने पर मजबूर करता है ॥सब एक ही थैले के चट्टे बट्टे हैं ।
ReplyDeleteमैं तुझे डराऊं, तू मुझे डराये
ReplyDeleteजिसकी बारी आये, दांव दे जाये
ईमानदार राजनेता हैं हम तो ताऊ
कभी अपनों को दगा नही देते भाऊ
रामराम
छापा करुना पर पड़ा, ममता थी निर्दोष ।
ReplyDeleteमहाठगिन माया ठगी, हृदय मुलायम तोष ।
हृदय मुलायम तोष, बड़ा मोहन मन सच्चा ।
छोड़ हमें जो जाय, उड़ा देते परखच्चा ।
सी बी आय संकेत, खो रही सत्ता आपा ।
टला बहुत स्टालिन, आज पड़ जाता छापा ॥
लोग पहले से समझते ही नहीं हैं..
ReplyDeleteबढ़िया है ,महोदय....
ReplyDeleteसाभार...
साथ तो छोड़ना ही नही चाहिए
ReplyDeleteये तो होना ही था ...
ReplyDeleteसी बी आई मेरी जेब में जो रहती है ...