...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
शुभकामनायें आदरणीय-कई दरिन्दे शेष है, मरते हैं मर जाँय |मारे मारे शर्म के, कुल मारे लटकाय ||
रविकर जी , हमारी ज्युडिशियरी (सिस्टम) से वह भी बोर हो गया था :)
शायद यही हश्र होता, पर जेल में स्वयं को फ़ांसी लगा लेना भी समझ के परे है.रामराम.
एक बेहया बदलाव के साक्षी बन रहे हैं हम लोग .ज़बर्ज़स्त तंज भाई साहब .व्यवस्था को राजा भैया ही हांक रहे हैं .
बहुत उम्दा प्रस्तुति करण साभार...........
समय के पहले ही चला गया..
बहुत शशक्त ...
हो वर्चस्व की यदि अंंतहीन जंग, उसे मरते दम तक कभी न हारो, भद्र-प्रतिद्वंद्वी, बर्ताव हो निश्छल, हो शत्रु कपटी, उसे होश से मारो। मरुधर जो उ...
शुभकामनायें आदरणीय-
ReplyDeleteकई दरिन्दे शेष है, मरते हैं मर जाँय |
मारे मारे शर्म के, कुल मारे लटकाय ||
रविकर जी , हमारी ज्युडिशियरी (सिस्टम) से वह भी बोर हो गया था :)
Deleteशायद यही हश्र होता, पर जेल में स्वयं को फ़ांसी लगा लेना भी समझ के परे है.
ReplyDeleteरामराम.
एक बेहया बदलाव के साक्षी बन रहे हैं हम लोग .
ReplyDeleteज़बर्ज़स्त तंज भाई साहब .व्यवस्था को राजा भैया ही हांक रहे हैं .
बहुत उम्दा प्रस्तुति करण
ReplyDeleteसाभार...........
समय के पहले ही चला गया..
ReplyDeleteबहुत शशक्त ...
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