...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
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सवाल
किस राह मे गिर गया, अबे 'परचेत' साले! फूल था और राह तूने अपनी कांटों की चुनी!
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नोट: फिलहाल टिप्पणी सुविधा मौजूद है! मुझे किसी धर्म विशेष पर उंगली उठाने का शौक तो नहीं था, मगर क्या करे, इन्होने उकसा दिया और मजबूर कर द...
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ये दिल निसार करके जाना कि राहे जफा होते है लोग, सच में, हमें मालूम न था कि यूं भी बावफा होते है लोग ! सोचते थे कि नेमत है खुदा की य...
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तमाम जंगल के बीहड़ों में जो कुछ घटित हो रहा हो, उससे क्या उस जंगल का राजा अंविज्ञ रह सकता है? या फिर यूं कहा जाए कि यदि उसे उसके राज्य मे...
शुभकामनायें आदरणीय-
ReplyDeleteकई दरिन्दे शेष है, मरते हैं मर जाँय |
मारे मारे शर्म के, कुल मारे लटकाय ||
रविकर जी , हमारी ज्युडिशियरी (सिस्टम) से वह भी बोर हो गया था :)
Deleteशायद यही हश्र होता, पर जेल में स्वयं को फ़ांसी लगा लेना भी समझ के परे है.
ReplyDeleteरामराम.
एक बेहया बदलाव के साक्षी बन रहे हैं हम लोग .
ReplyDeleteज़बर्ज़स्त तंज भाई साहब .व्यवस्था को राजा भैया ही हांक रहे हैं .
बहुत उम्दा प्रस्तुति करण
ReplyDeleteसाभार...........
समय के पहले ही चला गया..
ReplyDeleteबहुत शशक्त ...
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