यूं भी बावफा होते है लोग !
ये दिल निसार करके जाना कि राहे जफा होते है लोग, सच में, हमें मालूम न था कि यूं भी बावफा होते है लोग ! सोचते थे कि नेमत है खुदा की ये जज्बा , इल्म न था कि वफ़ा की कस्मे खाने वाले, इस कदर बेवफा होते है लोग ! दिल और आँख का ऐसा आपसी देखा जो समन्वय 'परचेत', नजर देखे, दिल शकूं पाए, मनीषी ऐसे ही नफ़ा होते है लोग !

बढ़िया है आदरणीय-
ReplyDeleteहदे पार करते रहे, जब तब दुष्टाबादि |
*अहक पूरते अहर्निश, अहमी अहमक आदि |
अहमी अहमक आदि, आह आदंश अमानत |
करें नारि-अपमान, इन्हें हैं लाखों लानत |
बहन-बेटियां माय, सुरक्षित प्रभुवर करदे |
नाकारा कानून व्यवस्था व्यर्थ ओहदे ||
*इच्छा / मर्जी
बढिया
ReplyDeleteयाद रखो, इतिहास साक्षी है
ReplyDeleteकि जब-जब इस धरती पर,
नारी दमन हुआ है,
उसके तुरंत बाद
कुरुक्षेत्र और लंका दहन भी हुआ है।,,,,सटीक पंक्तियाँ,,,,
Recent post: रंग गुलाल है यारो,
नारी के ऊपर अन्याय करने वाले नामर्द हैं.
ReplyDeleteसुन्दर और सटीक प्रस्तुति सुन्दर विचार
ReplyDeleteयाद रखो, इतिहास साक्षी है
ReplyDeleteकि जब-जब इस धरती पर,
नारी दमन हुआ है,
उसके तुरंत बाद
कुरुक्षेत्र और लंका दहन भी हुआ है।
...बहुत सटीक और सशक्त अभिव्यक्ति...
नारी की लाज बची होती तो महाभारत न होता, अब तो तय है।
ReplyDeleteबहुत ओजपूर्ण रचना है,चेतावनी देती-सी,
ReplyDeleteइसका शीर्षक इतना दयनीय न हो वही भाव दर्शाता तो सोने में सुहागे हो जाता!
बहुत ही प्रस्शत रचना, शुभकामनाएं
ReplyDeleteरामराम.