...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
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कबाब में हड्डी
अबे, पहले तो ये बता तू है कौन? तुम जैसों के मुंह लगना मेरा चस्का नहीं, मेरी तो बीवी से भी बिगड़ी पड़ी है, चल हट, मुझे सम्हालना तेरे बस का न...
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नोट: फिलहाल टिप्पणी सुविधा मौजूद है! मुझे किसी धर्म विशेष पर उंगली उठाने का शौक तो नहीं था, मगर क्या करे, इन्होने उकसा दिया और मजबूर कर द...
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ये दिल निसार करके जाना कि राहे जफा होते है लोग, सच में, हमें मालूम न था कि यूं भी बावफा होते है लोग ! सोचते थे कि नेमत है खुदा की य...
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तमाम जंगल के बीहड़ों में जो कुछ घटित हो रहा हो, उससे क्या उस जंगल का राजा अंविज्ञ रह सकता है? या फिर यूं कहा जाए कि यदि उसे उसके राज्य मे...

बढ़िया है आदरणीय-
ReplyDeleteहदे पार करते रहे, जब तब दुष्टाबादि |
*अहक पूरते अहर्निश, अहमी अहमक आदि |
अहमी अहमक आदि, आह आदंश अमानत |
करें नारि-अपमान, इन्हें हैं लाखों लानत |
बहन-बेटियां माय, सुरक्षित प्रभुवर करदे |
नाकारा कानून व्यवस्था व्यर्थ ओहदे ||
*इच्छा / मर्जी
बढिया
ReplyDeleteयाद रखो, इतिहास साक्षी है
ReplyDeleteकि जब-जब इस धरती पर,
नारी दमन हुआ है,
उसके तुरंत बाद
कुरुक्षेत्र और लंका दहन भी हुआ है।,,,,सटीक पंक्तियाँ,,,,
Recent post: रंग गुलाल है यारो,
नारी के ऊपर अन्याय करने वाले नामर्द हैं.
ReplyDeleteसुन्दर और सटीक प्रस्तुति सुन्दर विचार
ReplyDeleteयाद रखो, इतिहास साक्षी है
ReplyDeleteकि जब-जब इस धरती पर,
नारी दमन हुआ है,
उसके तुरंत बाद
कुरुक्षेत्र और लंका दहन भी हुआ है।
...बहुत सटीक और सशक्त अभिव्यक्ति...
नारी की लाज बची होती तो महाभारत न होता, अब तो तय है।
ReplyDeleteबहुत ओजपूर्ण रचना है,चेतावनी देती-सी,
ReplyDeleteइसका शीर्षक इतना दयनीय न हो वही भाव दर्शाता तो सोने में सुहागे हो जाता!
बहुत ही प्रस्शत रचना, शुभकामनाएं
ReplyDeleteरामराम.