Wednesday, January 13, 2010

आपके दिमाग की प्रोग्रामिंग ही गड़बड़ हो तो ...?

आप में से बहुत से लोग इस बारे में पहले से ही जानते होंगे, मगर जो इस बारे में सचमुच में नहीं जानते, उनसे मेरा आग्रह है कि यह करके देखिये आपको पता चल जाएगा ;
अभी आप टेबल के समीप कुर्सी पर बैठ अपने कंप्यूटर पर चटर-पटर कर रहे हैं न ? अब ज़रा अपनी कुर्सी को बैठे-बैठे टेबल से थोड़ा दूर खिसकाइए ! कुर्सी अथवा स्टूल पर बैठे-बैठे अपने दाहिने पैर को थोड़ा ऊपर हवा में उठाइये, अब उसे घड़ी की दिशा में गोल-गोल घुमाइए (CLOCKWISE CIRCLES) ! ऐसा करते रहिये और साथ ही दाहिने हाथ की उंगली से हवा में बार बार सिक्स(6) बनाइये ! अब देखिये कि आपका दिमाग आपके घड़ी की दिशा में गोल-गोल घूमते पैर के निर्देशों को सही तरीके से FOLLOW कर रहा है अथवा नहीं !

आप ज़रा यह करके तो देखिये, पता चल जाएगा...............हैं न प्रोग्राम्मिंग में गड़बड़ी ? :) )

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12 Comments:

Blogger डॉ. महफूज़ अली (Dr. Mahfooz Ali) said...

अभी ट्राई कर के देखता हूँ....

Wednesday, 13 January, 2010  
Blogger निर्मला कपिला said...

हा हा हा सही बात है । धन्यवादभी उठना पडेगा गडबडी को सही करने।

Wednesday, 13 January, 2010  
Blogger डॉ. महफूज़ अली (Dr. Mahfooz Ali) said...

अरे! यह क्या????? सच में प्रोग्रामिंग में गड़बड़ी है.....

:)

:)

:)

:)

Wednesday, 13 January, 2010  
Blogger ललित शर्मा said...

हा हा हा तीनो मे से दो ही चीज घुमती है,
लेकिन दिमाग जरुर घुमता है साथ मे कुर्सी भी। सब दो घंटे बाद सब स्थिर हो जाएगा।:) आभार

Wednesday, 13 January, 2010  
Blogger Renu goel said...

उफ्फ्फ्फ़ ....यहाँ तो दिमाग ही गोल गोल घूमने लगा है ....चक्कर है भाई घनचक्कर
हा हा हा ...

Wednesday, 13 January, 2010  
Blogger vandana gupta said...

hahahaha..........sahi ja rahe hain aur sabko nacha bhi rahe hain...waah.

Wednesday, 13 January, 2010  
Anonymous Anonymous said...

बच्चा गोदियाल, कल्याण हो ! बच्चा, आज हमारे मठ में क्यों नहीं आये? आज बाबा को ही चेले के पास आना पड़ा, बच्चा, जो कुछ तुम करने को कह रहे हो, वह सब हो नहीं पा रहा है, यहाँ हिमालय पर हमारी कुल्फी जम रही है, कैसे हिलाऊं डुलाऊं? गर्माहट लाने की कोई व्यवस्था कराओ बच्चा !

Wednesday, 13 January, 2010  
Blogger पी.सी.गोदियाल "परचेत" said...

रुकिए लंगोट बाबा, ज़रा चिमटा चूल्हे में रखता हूँ आपको गरम करने के लिए ! :)

Wednesday, 13 January, 2010  
Blogger Unknown said...

गोदियाल जी, सायकल का एक छर्रा अपने बायें (उलटे) हाथ की हथेली पर रखें। दाहिने (सीधे) हाथ की मध्यमा (बीच वाली) उँगली को तर्जनी (अँगूठे के पास वाली) उँगली के ऊपर रख कर अँगूठे की तरफ ले जाइये और दोनों उँगलियों द्वारा इस प्रकार से बने क्रॉस से छर्रे को छू कर देखिये और बताइये कि कितने छर्रे हैं।

जरा कर के देखिये!

Wednesday, 13 January, 2010  
Blogger Pt. D.K. Sharma "Vatsa" said...

लगे हाथ ये भी बता देते कि दिमाग की इस गडबडी को ठीक कहाँ से कराया जाए :)

Wednesday, 13 January, 2010  
Blogger डॉ टी एस दराल said...

हा हा हा ! गोदियाल जी , गड़बड़ ही गड़बड़ है।

Wednesday, 13 January, 2010  
Blogger Mahim said...

very nice writing

Thursday, 28 January, 2010  

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