Wednesday, January 20, 2010

एक ख्याल ;

कितनी अजीब सी बात है कि एक तरफ जो इंसान भगवान् के अस्तित्व को सिरे से नकारता है, और उसकी शरण स्वीकार नहीं करता, दूसरी तरफ अमूमन वही इंसान अपने स्वार्थ के लिए दूसरे इंसान की गुलामी करने से जरा भी परहेज नहीं करता !
-पी.सी. गोदियाल

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11 Comments:

Blogger डॉ. महफूज़ अली (Dr. Mahfooz Ali) said...

सचमुच यह सोचने का विषय है....

Wednesday, 20 January, 2010  
Blogger संजय बेंगाणी said...

भगवान की शरण में भी तो स्वार्थवश जाता है.

Wednesday, 20 January, 2010  
Blogger ललित शर्मा said...

अस्ति मे भी है और नास्ति मे भी है
सिर्फ़ समझ समझ का फ़ेर है,

बसंत पर्व की शुभकामनाएं

Wednesday, 20 January, 2010  
Blogger ललित शर्मा said...

अस्ति मे भी है और नास्ति मे भी है
सिर्फ़ समझ समझ का फ़ेर है,

बसंत पर्व की शुभकामनाएं

Wednesday, 20 January, 2010  
Blogger Unknown said...

स्वार्थ मनु्ष्य की बुद्धि को भ्रष्ट कर देता है।

Wednesday, 20 January, 2010  
Blogger सदा said...

सोचनीय पहलू है यह भी ।

Wednesday, 20 January, 2010  
Blogger संगीता पुरी said...

सटीक !!

Wednesday, 20 January, 2010  
Blogger दिगम्बर नासवा said...

ये दस्तूर है दुनिया का ........... इंसान की फ़ितरत .......

Wednesday, 20 January, 2010  
Blogger अजय कुमार said...

अजीब तो है

Wednesday, 20 January, 2010  
Blogger dipayan said...

सही कहा आपने. सोचने पर मज़बूर करता है.

Wednesday, 20 January, 2010  
Blogger शरद कोकास said...

इसलिये कि वह इंसान मे भगवान को नही देखता

Saturday, 30 January, 2010  

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