यूं भी बावफा होते है लोग !
ये दिल निसार करके जाना कि राहे जफा होते है लोग, सच में, हमें मालूम न था कि यूं भी बावफा होते है लोग ! सोचते थे कि नेमत है खुदा की ये जज्बा , इल्म न था कि वफ़ा की कस्मे खाने वाले, इस कदर बेवफा होते है लोग ! दिल और आँख का ऐसा आपसी देखा जो समन्वय 'परचेत', नजर देखे, दिल शकूं पाए, मनीषी ऐसे ही नफ़ा होते है लोग !

बिजली खाने के लिए, है स्वतंत्र रोबोट |
ReplyDeleteपन बिजली में आजकल, उत्तरांचल की चोट |
उत्तरांचल की चोट, ताप बिजलीघर आये |
है रो बो में खोट, नहीं कोयला चबाये |
दस जनपथ पर टहल, टहल करता है घर के |
बिजली रूपी कोल, तानता है भर भर के ||
उत्कृष्ट प्रस्तुति का लिंक लिंक-लिक्खाड़ पर है ।।
:):) बहुत बढ़िया
ReplyDeleteकार्टून बोलता है. वास्तव में आपके कार्टून सामयिक, गहरी व मार्मिक बात कहते हैं. आभार !
ReplyDeleteसटीक व्यंग मारा है ... निशाने पे ...
ReplyDeleteबहुत सुन्दर प्रस्तुति!
ReplyDeleteआपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (09-09-2012) के चर्चा मंच पर भी होगी!
सूचनार्थ!
इस शोध के लिये एक नया विभाग खुले।
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