ये दिल निसार करके जाना कि राहे जफा होते है लोग, सच में, हमें मालूम न था कि यूं भी बावफा होते है लोग ! सोचते थे कि नेमत है खुदा की ये जज्बा , इल्म न था कि वफ़ा की कस्मे खाने वाले, इस कदर बेवफा होते है लोग ! दिल और आँख का ऐसा आपसी देखा जो समन्वय 'परचेत', नजर देखे, दिल शकूं पाए, मनीषी ऐसे ही नफ़ा होते है लोग !
लॉजिक है आपकी बात में।
ReplyDeleteसुप्रभात, सर जी।
ReplyDeleteसत्य कथन,इन्सान ने अन्य जीवों पर और सारी प्रकृति पर जो अत्याचार किये है उसी का खामियाज़ा भुगत रहा है आज.
ReplyDeleteआभार, प्रतिभा जी।
Deleteआपकी इस प्रस्तुति का लिंक 28.5.2020 को चर्चा मंच पर चर्चा - 3715 में दिया जाएगा
ReplyDeleteधन्यवाद
दिलबागसिंह विर्क
वाह! लाजवाब आदरणीय सर.
ReplyDeleteसादर
बहुत खूब।
ReplyDeleteकरम गति टारे नाहि करें।
आप सबका, शुक्रिया।
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