रात गहरी है मगर यकीं रख, मैं सोऊंगा नहीं।
तू, जितना मर्जी मुझे रुलाने की कोशिश कर,
मगर, मैं तनिक भी रोऊंगा नहीं,
बेदना बहुत है इस दिल में मगर,
तेरे बहकावे में आकर, आपा मैं अपना खोऊंगा नहीं।
...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
रात गहरी है मगर यकीं रख, मैं सोऊंगा नहीं। तू, जितना मर्जी मुझे रुलाने की कोशिश कर, मगर, मैं तनिक भी रोऊंगा नहीं, बेदना बहुत है इस दिल में म...
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