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सर पे बाल न हों तो फिजूल में कंघे नहीं लेना , आईने में उभरते अपने ही अक्श का संज्ञान नंगे नहीं लेना , ज़माना सचमुच में बहुत खराब हो गया है , इसीलिये बेवजह किसी से पंगे नहीं लेना।
सरे राह किसी को एक रूपये का सिक्का भीख में देना चाहो,तो भिखमंगे नहीं लेते ! अब तो सारे भिखमंगे भ्रष्ट नेता हो गए हैं .. इनको एक रुपया नहीं करोड़ों का खजाना मिल गये हैं ... हाँ ये अलग बात है की आज सच्चाई और ईमानदारी भीख मांग रहें हैं ....
ये दिल निसार करके जाना कि राहे जफा होते है लोग, सच में, हमें मालूम न था कि यूं भी बावफा होते है लोग ! सोचते थे कि नेमत है खुदा की ये जज्बा , इल्म न था कि वफ़ा की कस्मे खाने वाले, इस कदर बेवफा होते है लोग ! दिल और आँख का ऐसा आपसी देखा जो समन्वय 'परचेत', नजर देखे, दिल शकूं पाए, मनीषी ऐसे ही नफ़ा होते है लोग !
तमाम जंगल के बीहड़ों में जो कुछ घटित हो रहा हो, उससे क्या उस जंगल का राजा अंविज्ञ रह सकता है? या फिर यूं कहा जाए कि यदि उसे उसके राज्य में अन्याय होता दिखाई न दे, तो फिर क्या ऐसे नजरों से लाचार प्रतिनिधि को राजा बने रहने का कोई हक़ है? यदि उसे हमेशा किसी तीसरे ने ही आकर जगाना है, तो पूरे जंगलात के लिये यह निश्चिततौर पर एक बड़ी चिंता का विषय है। और इससे भी महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि क्या उसे जगाने वाला भी वाकई ईमानदार प्रयास कर रहा है, या सिर्फ खानापूर्ति, ताकि सिर्फ सुहानुभूति बटोरने के लिए जंगल की तमाम वादी की आँखों मे धूल झोंक सके ? और ठीक इसी सन्दर्भ में श्रीमती सोनिया गांधी के उस पत्र को भी रखा जा सकता है, जो उन्होंने कल इस देश के प्रधानमन्त्री श्री मनमोहन सिंह को लिखा और जिसमे उनसे यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि आईएएस अधिकारी सुश्री दुर्गा शक्ति के साथ कोई अन्याय न हो। उत्तर प्रदेश में बैठे...
नोट: फिलहाल टिप्पणी सुविधा मौजूद है! मुझे किसी धर्म विशेष पर उंगली उठाने का शौक तो नहीं था, मगर क्या करे, इन्होने उकसा दिया और मजबूर कर दिया ! हमारे मुस्लिम समाज के कुछ तथाकथित बुद्धिजीवियों ने पिछले कुछ समय से इस हिन्दी जगत में न सिर्फ नफरत का आतंक फैला रखा है, अपितु अभी दो दिन पहले एक ने तो हिन्दू महिलाओं पर ही सीधे-सीधे अश्लील बातें अपने ब्लॉग के मार्फ़त यहाँ इस हिन्दी जगत पर लिख डाली ! जिसे में अपने पिछले लेख में उल्लेखित कर चूका हूँ ! ये दूसरे धर्मो की महिलाओं पर तो जो मर्जी बयानबाजी, आरोप, कटाक्ष और अश्लील भाषा अपनी गंदी जुबां से बयाँ कर डालते है, ( हाल में इनके एक तथाकथित विद्वान् का यहाँ उदाहरण दिया जा सकता है जिसने अपनी गंदी जुबा खोल पूरी महिला जाति का यह कहकर अपमान किया कि महिलाए तो सिर्फ बच्चे पैदा करने के लिए होती है!) मगर इन गंदी जुबान वालों ने कभी यह देखने की कोशिश नहीं की कि बुर्के में ढकी उनकी खुद की एक महिला को चांदनी चौक में खड़े होकर गोल गप्पे खाने में कितनी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है! इनके एक बुद्धिजीवी ने कुछ महीनो पहले अपने महान धर्म की विशेषताए बताते हुए लिख...
"सरे राह किसी को एक रूपये का सिक्का
ReplyDeleteभीख में देना चाहो,तो भिखमंगे नहीं लेते!"
सत्यवचन!
"सरे राह किसी को एक रूपये का सिक्का
ReplyDeleteभीख में देना चाहो,तो भिखमंगे नहीं लेते!
भिखमंगे भी आजकल बहत स्टैण्डर्ड के हो गए हैं.....
lekin vote walon ke baare me kya kahenge..
ReplyDeleteअजी हरिदुवार मैने मैने एक भिखारी को ५० पेसे का सिक्का दे दिया..... वो उसे मेरे मुंह पर मार कर चला गया....
ReplyDeleteइसीलिये हम आजकल किसी से पंगे नहीं लेते !!
इसीलिये हम आजकल किसी से पंगे नहीं लेते !!
ReplyDeleteआपके पंगे न लेने से क्या होगा, हम पंगे तो लेंगे ही.
सुन्दर रचना
किसी से पंगा नहीं लेने का।
ReplyDeleteअच्छी बात है, पंगे नहीं ही लेने चाहिये.
ReplyDeleteजमाना वाकई में बहुत खराब आ गया है...शुक्र मनाईये कि आप बचे हुए हैं. अगर कहीं पंगा लिया होता तो :-)
ReplyDeleteसादर!
ReplyDeleteक्या कहूँ उम्र में छोटा हूँ, लेकिन जब पिछवाड़े लटकी हो बन्दुक तो वाकई पंगे नहीं लेते \
रत्नेश त्रिपाठी
महँगाई पर सटीक और सार्थक लेखन!
ReplyDeletesahi kaha sir pange lena matlab aafat mol lena...waise sundar abhivyakti....
ReplyDeleteसरे राह किसी को एक रूपये का सिक्का
ReplyDeleteभीख में देना चाहो,तो भिखमंगे नहीं लेते !
अब तो सारे भिखमंगे भ्रष्ट नेता हो गए हैं ..
इनको एक रुपया नहीं करोड़ों का खजाना मिल गये हैं ...
हाँ ये अलग बात है की आज सच्चाई और ईमानदारी भीख मांग रहें हैं ....
बहुत सही है।
ReplyDeleteकि ये दुनिया सचमुच में बहुत खराब हो गई,
ReplyDeleteइसीलिये हम आजकल किसी से पंगे नहीं लेते !
पंगे ले कर ही तो दुनिया खराब हो गयी है... :):)
बढ़िया मुक्तक
हमने तो आज तक किसी से पंगा नहीं लिया ....एक बार उपरवाले से लिया था , नीचे भेज दिया,,,, भुगत रहे है !!!
ReplyDeleteबढ़िया मुक्तक!
ReplyDeleteबहुत सही...पंगे लेने का जमाना नहीं रहा!! :)
ReplyDeleteसत्य वचन महाराज !
ReplyDeleteपंगे लेना आसान नहीं .. दूर रहना ही अच्छा है !!
ReplyDeleteइसीलिये हम आजकल किसी से पंगे नहीं लेते !!
ReplyDeleteबहुत खूब, लाजबाब !
हम भी किसी से पंगे नहीं लेते जी
ReplyDeleteशानदार पंक्तियां
बहुत अच्छी लगी आज की यह पोस्ट
प्रणाम
ये दुनिया सचमुच में बहुत खराब हो गई,
ReplyDeleteइसीलिये हम आजकल किसी से पंगे नहीं लेते .....सुन्दर रचना
hai baat me dam..
ReplyDeletesahmat hai ham...
kunwar ji,
गली से गुजरती इक मस्त-बयार कह रही थी
ReplyDeleteकि ये दुनिया सचमुच में बहुत खराब हो गई,
इसीलिये हम आजकल किसी से पंगे नहीं लेते !!
...satya vachan...
चंद शब्दों मे ही गज़ब की बात कह दी।
ReplyDeleteहमने तो अकसर आपको गद्दारों से पंगा लेते हुए देखा है।
ReplyDeleteबिलकुल ठीक करते हैं गोदियाल जी ।
ReplyDeleteGodiyal ji jab aap nahi lete panga to ham ka lenge...
ReplyDeletebahut acchi kavita..
aapka aabhaar...!!