यूं भी बावफा होते है लोग !
ये दिल निसार करके जाना कि राहे जफा होते है लोग, सच में, हमें मालूम न था कि यूं भी बावफा होते है लोग ! सोचते थे कि नेमत है खुदा की ये जज्बा , इल्म न था कि वफ़ा की कस्मे खाने वाले, इस कदर बेवफा होते है लोग ! दिल और आँख का ऐसा आपसी देखा जो समन्वय 'परचेत', नजर देखे, दिल शकूं पाए, मनीषी ऐसे ही नफ़ा होते है लोग !

पेड़ बहुत मजबूत है. कार्टून बढ़िया है.
ReplyDeleteकरारा व्यंग्य।
ReplyDeleteबढ़िया कार्टून ...... स:परिवार होली की भी हार्दिक शुभकामनाएं.....
ReplyDeleteदेश कितना बड़ा धक्का झेल गया है..
ReplyDeleteइन पेड़ों को लोग हर पांच साल बाद फिर काफी खाद पानी दे आते हैं
ReplyDeleteपेड़ की जड़ें बहुत गहरी हैं ।
ReplyDeleteबढ़िया व्यंग ।
एक धक्का और दो , इस पेड को ही तोड दो
ReplyDeleteकाश ये पेड भी जल्दी टूटे ...
ReplyDeletesateek bolti tasveer..
ReplyDeleteसाँपों से भरा दरख़्त है। इनकी कोई साख ही नहीं तो बट्टा क्या लगेगा। हाँ इस दरख़्त के कारण देश ज़रूर रसातल में जा रहा है।
ReplyDeleteवाह क्या बात है! थोड़ा मट्ठा जड़ में भी जाना चाहिये।
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