...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
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वाहियात
आज जैसे उन्होंने मुझे, पानी पी-पीकर कोसा, इंसानियत से 'परचेत', अब उठ गया भरोसा।
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नोट: फिलहाल टिप्पणी सुविधा मौजूद है! मुझे किसी धर्म विशेष पर उंगली उठाने का शौक तो नहीं था, मगर क्या करे, इन्होने उकसा दिया और मजबूर कर द...
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देशवासियों तुम हमें सत्ता देंगे तो हम तुम्हें गुजारा भत्ता देंगे। सारे भूखे-नंगों की जमात को, बिजली-पानी, कपड़ा-लत्ता देंगे। ...
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ये दिल निसार करके जाना कि राहे जफा होते है लोग, सच में, हमें मालूम न था कि यूं भी बावफा होते है लोग ! सोचते थे कि नेमत है खुदा की य...

पेड़ बहुत मजबूत है. कार्टून बढ़िया है.
ReplyDeleteकरारा व्यंग्य।
ReplyDeleteबढ़िया कार्टून ...... स:परिवार होली की भी हार्दिक शुभकामनाएं.....
ReplyDeleteदेश कितना बड़ा धक्का झेल गया है..
ReplyDeleteइन पेड़ों को लोग हर पांच साल बाद फिर काफी खाद पानी दे आते हैं
ReplyDeleteपेड़ की जड़ें बहुत गहरी हैं ।
ReplyDeleteबढ़िया व्यंग ।
एक धक्का और दो , इस पेड को ही तोड दो
ReplyDeleteकाश ये पेड भी जल्दी टूटे ...
ReplyDeletesateek bolti tasveer..
ReplyDeleteसाँपों से भरा दरख़्त है। इनकी कोई साख ही नहीं तो बट्टा क्या लगेगा। हाँ इस दरख़्त के कारण देश ज़रूर रसातल में जा रहा है।
ReplyDeleteवाह क्या बात है! थोड़ा मट्ठा जड़ में भी जाना चाहिये।
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