धर्म-ईमान,
मालूम है, यहां सबकुछ,
टके-सेर बिकता है,
और जो खरीददार,
वो वैंसा है नहीं,
जैंसा दिखता है।
...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
तुझे न पा सकने का मुझे मलाल तो था, क्यों न पा सका, दिल मे ये सवाल तो था, न पा सकने की चाहे वजह कोई भी रही हो, वो पल था,दिन था,महिना था औ...
सटीक
ReplyDeleteबहुत सुन्दर।
ReplyDeleteराम मन्दिर के शिलान्यास की बधाई हो।