धर्म-ईमान,
मालूम है, यहां सबकुछ,
टके-सेर बिकता है,
और जो खरीददार,
वो वैंसा है नहीं,
जैंसा दिखता है।
...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
क्या बताऊं कि ये चोंतीस साल कैसे बीते, किस मुश्किल में हर लम्हा गुजरा जीते-जीते, याद तो होगा तुम्हें कि मैंने तुमको भी न्योता दिया था, जव...
सटीक
ReplyDeleteबहुत सुन्दर।
ReplyDeleteराम मन्दिर के शिलान्यास की बधाई हो।