धर्म-ईमान,
मालूम है, यहां सबकुछ,
टके-सेर बिकता है,
और जो खरीददार,
वो वैंसा है नहीं,
जैंसा दिखता है।
...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
थप्पड खाकर वो 'डिस' उनकी यूं, थोड़ी हमने भी चख दी थी, बस, ग़लती यही रही हमारी कि दुखती रग पर उंगली रख दी थी।
सटीक
ReplyDeleteबहुत सुन्दर।
ReplyDeleteराम मन्दिर के शिलान्यास की बधाई हो।