पशेमानी

तुम्हारी ख़्वाहिशों के बोझ तले दबकर भी 

मैं तुमको जरूर नजर आया होता,

अगर ऐ जालिम तुमने, कामयाबी का दर्जा पाने को 

अपना ये जाल न बिछाया होता।

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