रूबर

 सेवानिवृत्ति का जुनून 

आहिस्ता-आहिस्ता 

मौत के घाट उतार देगा हमको, 

कहां मालूम था कि 

गांव का अकेलापन इकदिन, 

इस कदर मार देगा हमको।

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