बंजारा

अरे ओ बंजारे!

ठिकाना ना ही 

तेरा मुकम्मल है 

और ना ही मेरा मुकम्मल,

पहचान मतलबी,

राह अजनबी, 

अचानक मिल गए

इक वीराने सहरा मे,

फिर मिलें न मिलें

तू भी मुसाफिर, 

मैं भी मुसाफिर!

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