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अधूरी हसरत

दिलों की हसरत, मिलन की चाहत, न तो इबादत ही रंग लाई  और न  ही दिल की दुआ , हो जाता मिलन अचानक हमारा भी किसी मोड़ पर 'परचेत,'  कभी ऐसा इत्तेफाक न हुआ।

दौर-ए-बदलाव

सांझ ढले, मेरे साथ बैठकर  एक पैग व्हिस्की, कभी वो संग-सग पीती थी, जब न तो आभासी दुनिया थी, और ना ही वो इस कदर , अलग ही दुनियां में रहकर जीती थी। अब उसने व्हिस्की पीना छोड़ दिया है, आजकल दिन-रात सेल-फोन पीती है।।

हौंसला

हौसलों के दमपर अभी तक,  जी है जिंदगी हमने, डटकर किया है मुकाबला,  राह की दुश्वारियों का, हर शै से निकले हैं हम,  उबरकर भी, उभरकर भी, जरा भी न कभी बेबस हुए,  बोझ ढोते लाचारियों का।

सवाल

वो लम्हा तुम जरा बताओ, जब मैं तुम्हारे संग नहीं था, कौन सा था वो लम्हा-लम्हा जिसमें, प्यार का रंग नहीं था?

यकीनन

तुम जानते हो कि मेरे होते,  सलामत है लाज तुम्हारी, इसीलिए आज तक मैं, तुम्हारे राज तक नहीं गया । मांगने की आदत जिंदगी में  मुझसे कभी पाली न गई, मोहब्बत में इसीलिए मैं भरोंसे के  अल्फ़ाज़ तक नहीं गया ।

टीस

साफ-गोई की सजा यह मिली हमको  कि हम झूठे बन गये, यही वजह थी कि जहां के आगे  ऐ जिंदगी,  हम अनूठे बन गये।

संतुष्टि

यूं तो इस मेरे किरदार को,  अंधेरों से हमेशा शिकायत ही रही, किंतु चलता चला गया,  नुक़्स भी मिले, दिशा भी मिली।