बेवफा ख्वाहिशे

 


इतनी संजीदा जे बात तुमने, 
गर यूं मुख़्तसर सी न कही होती,
मिलने को हम तुमसे, 
मुक्तसर से अमृतसर पैदल ही चले आते।

Comments

  1. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 20.8.2020 को चर्चा मंच पर दिया जाएगा। आपकी उपस्थिति मंच की शोभा बढ़ाएगी|
    धन्यवाद
    दिलबागसिंह विर्क

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