Sunday, January 10, 2021

खलिश..

मंजिल के करीब पहुंचने ही वाली थी

जब यह सफ़र-ए-जिन्दगी, ऐ दोस्त!

तुमने नींद मे खलल डालकर, 

स्वप्न विच्छेदन कर दिया

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दानदाता च महीपति;

कडकछाप मुद्रीकृत सारे ब्लौगर-सलौगर,  यू-ट्यूब पे कमाई की धौंस वाले यूट्यूबर, आज सबके सब मैंने पशेमान कर दिए, दस सेंट एडसेंस से मैंने भी कमाए...