...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
दिल मे न गिला रखते, जुबां पर न सिकवा आता,
गर दृष्टा ही सही होती, दृष्टिकोण ही बदल जाता,
सब्र से उठा लेते, उनकी हर इक तशद्दुद 'परचेत',
वाह
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हो वर्चस्व की यदि अंंतहीन जंग, उसे मरते दम तक कभी न हारो, भद्र-प्रतिद्वंद्वी, बर्ताव हो निश्छल, हो शत्रु कपटी, उसे होश से मारो। मरुधर जो उ...
वाह
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