यथार्थता


सफर रुका नहीं और 

मिलते गये काफिले हमको,

शिकवे गले मिले और

दिल पे लगा गये गिले हमको, 

इम्तहानों के दौर से, 

हम बेधडक गुज़रे हैं 'परचेत',

हौंसले रक्त से मिले 

और फैसले वक्त से मिले हमको।


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