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Showing posts from February, 2011

शारदा !

कृष्णा बाथरूम से नहाकर ज्यों ही बाहर अपने कमरे में पहुंचा और उसने तौलिये से अपने गीले बालों को हौले-हौले रगड़ना शुरू किया, तभी किचन से स्वाति ने भी कमरे में प्रवेश किया और बोली; सुनो जी, आज गणतंत्र दिवस की छुट्टी है, मार्केट बंद रहेगा। तुम भी फ्री हो, क्यों न आज हम लोग माँ को मिलने चलें, हमारी शादी के बाद जबसे बेचारी जेल गई है, हम लोग एक बार भी उनकी कुशल-क्षेम पूछने नहीं गए। एक बार राहुल को तो उनसे मिला देते, वह भी दो-ढाई साल का हो गया है, उसने भी अभी तक अपनी दादी को नहीं देखा। स्वाति की इस बात पर एक बार तो कृष्णा भड़क ही गया, और स्वाति की तरफ देखते हुए गुस्सैल अंदाज में बोला, यार मैं तुम्हे कितनी बार बता चुका कि मुझे नहीं मिलना किसी माँ-वां से, मेरी माँ पांच साल पहले मर चुकी, अब मेरी कोई माँ-वां नहीं है। कृष्णा की बात सुनकर, थोड़ा रूककर स्वाति ने अपने दोनों हाथों से उसका बाजू पकड़ते हुए उसे पुचकारते हुए बोली "यार, वो तुम्हारी माँ है, तुम कैसे निष्ठुर बेटे हो। एक बार भी यह नहीं सोचते कि बिना उनकी बात सुने ही हमलोगो ने उनसे इसतरह किनारा कर लिया, कोई तो बात रही होगी जो तुम्हारी माँ ने...

wife is the subject matter of solicitation.

When I was asked by my friends, "What is the secret behind your happy married life?" I earnestly replied, I am faithful to my wife. On our wedding day, while leading her in seven steps around the sacred fire, the priest gave me following five commandments for a successful married life; If you find in yourself a desire, Abundance of resources and comforts, for her, it is necessary for good equation, because wife is the subject matter of solicitation. To maintain a blooming marital life, you need to constantly work on your relation, because wife is the subject matter of solicitation. To make you feel good keep her eternally happy, and avoid irritation and frustration, because wife is the subject matter of solicitation. Be nice and polite in front of her, and always try to control your stimulation, because wife is the subject matter of solicitation. And finally, during any festival, to your in-laws, you must not forget to extend your felicitation, because wife is the ...

मुस्लिम भाइयों से एक सवाल !

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यह जो ऊपर आपलोग तस्वीर देख रहे है,यह पाकिस्तान की है,जहां लोग सीआईए के तथाकथित जासूस रेमंड डेविस को जिनेवा संधि के तहत कोई भी डिप्लोमैटिक स्टेटस देने का विरोध कर रहे है, और उसे मौत की सजा देने की मांग कर रहे है! आरोप है कि उसने हाल में दो पाकिस्तानी हथियारबंद युवकों को लाहौर में इसलिए गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया था, क्योंकि वे कथित तौर पर उसे उसवक्त लूटना चाहते थे, जब वह एक एटीम से पैसे निकालकर जा रहा था! लेकिन अब यह बाते सामने आ रही है कि वह एक सीआईए एजेंट था और स्थानीय आतंकवादियों के साथ मिला हुआ था! अब सवाल मैं अपने उन मुस्लिम भाइयों,खासकर पाकिस्तानी मुस्लिम भाइयों से पूछना चाहता हूँ, जो गोधरा काण्ड पर आये हालिया न्यायालय के फैसले के बाद से ही भारत और खासकर हिन्दुओं के प्रति तमाम मीडिया और गली-चौराहों पर जहर उगले जा रहे है! मैं यह मानता हूँ कि यह हमारे इस देश का दुर्भाग्य है कि हमारे बहुत से लोगो में आत्मसम्मान और गौरव की हमेशा से कमी रही है! अगर ऐसा न होता तो गोधरा के उस दर्दनाक वाकिये के बाद न इतनी कहानियाँ हम लोग गढ़ते और न फिर गुजरात दंगे होते! आज यह भी न होता कि जो कोर्ट का...

क्या अहम् है,खबर की जानकारी या फिर आपका स्वास्थ्य ?

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बहुत दिनों से सोच रहा था कि इस बाबत चंद लाइने लिखूं, और आखिरकार आज हिमाचल के कुल्लू गाँव की एक खबर ने कलम हाथ में थमा ही दी! एक खबर के मुताबिक़ कुल्लू के एक गाँव के लोगो ने सामूहिक फैसला लिया कि दिन प्रतिदिन टीवी धारावाहिकों में बढ़ती अश्लीलता के चलते, अब यदि गाँव का कोई परिवार खर्च वहन कर पाने में सक्षम है तो हर घर में युवा वर्ग के लिए अलग टीवी सेट होगा,और बुजुर्गों के लिए अलग ! यदि आप यह खर्च नहीं उठा पाते तो जिस वक्त बुजुर्ग लोग टीवी देख रहे हो, कोई युवा उस स्थान पर नहीं जाएगा, इसी तरह यदि जब युवा वर्ग टीवी देख रहा हो तो कोई बुजुर्ग उस जगह नहीं टपकेगा ! यदि किसी वजह से ऐसी बंदिशे लागू करने में दिक्कत आ रही हो तो टीवी चलेगा ही नहीं! और वहाँ के लोगो ने इस फैसले का स्वागत भी किया है ! प्रिंट मीडिया और इलेक्ट्रोनिक मीडिया दोनों ही अपने-अपने क्षेत्र में अपनी अलग अहम् भूमिका रखते है (थे), बशर्ते कि वह अपना दायित्व निष्पक्ष निभाए ! मगर अफ़सोस कि आज के इस भ्रष्ट माहौल में चंद अपवादों को छोड़ निष्पक्ष कुछ भी नहीं है! यह भी आम भारतीय भली भांति जानता है कि आज इस देश में यह प्रिंट और इलेक्ट्रोनिक म...

कार्टून कुछ बोलता है-कलमाडी की सफाई

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कार्टून कुछ बोलता है-नया एग्रीगेटर !

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तुसी बस करो पाजी, अब और न बनाओ !

जैसी कि पहले से ही उम्मीद थी, एक लम्बे अन्तराल के बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह कल मीडिया से मुखातिब तो हुए मगर उनकी ढुलमुल भाषा शैली ने देश के आम जन को एक बार फिर से निराश किया ! जैसा कि मैं पहले भी कह चुका कि निसंदेह श्री सिंह जी अपने व्यक्तिगत जीवन में एक सम्मानित हस्ती है, लेकिन जब पूरे देश का सवाल हो तो उनकी व्यक्तिगत छवि से किसी देशवासी को क्या लेना देना? और पता नहीं क्यों, मगर कभी-कभार तो उनके प्रवचनों को सुनकर शरीर में एक अजीब सी उकताहट सी होने लगती है! क्या मनमोहन जी देशवासियों को इतना भोला और मूर्ख समझते है, जो बार-बार बस कुछ रटी-रटाई शब्दावली इस्तेमाल करते है? ईमानदारी से यह क्यों नहीं बताते कि आपने प्रधानमंत्री की हैसियत से पिछले सात सालों में किया क्या ? देश ने जो अराजकता, भ्रष्टाचार और महंगाई की स्थित पिछले सात सालों में देखी, वैसी शायद पहले कभी नहीं देखी होगी ! ऊपर से जनाब आप कहते है कि अभी तो हमारी सरकार को बहुत से लक्ष्य हासिल करने है ! अरे साहब, अब इस देश के आम आदमी की यह हैसियत नहीं रही कि वह आपकी सरकार के और अधिक घोटाले झेल सके ! आप कहते है कि हम दोषियों को सजा देंगे...

मंसूबे !

सर्वप्रथम सभी मित्रों को ईद-ए-मिलाद ( हजरत मुहम्मद का जन्म दिन ) की मुबारकबाद ! काश कि भिन्न-भिन्न देश,काल और परिस्थितियों में अनेक धर्मभीरु मुल्लाओं ने निजी स्वार्थों और अपनी तुच्छ ख्वाइशों की पूर्ति के लिए अपने पैगम्बर के नाम का बेजा इस्तेमाल न किया होता और इन्हें सिर्फ अपनी धार्मिक आस्था की नीव की एक मजबूत कड़ी तक ही सीमित रखकर, दूसरे धर्म के अनुयायियों के लिए भी उन्हें उसी आस्था के प्रेरणा स्रोत का सूत्रधार बनाया होता, जिसकी ये खुद अपेक्षा करते है ! काश, कि ये यह समझ पाते कि किसी भी हस्ती और धर्म के प्रति सम्मान दिल में खुद जगता है, जोर-जबरदस्ती पैदा नहीं किया जा सकता ! अगर बल प्रयोग कर ही वह वास्तविक सम्मान हासिल किया जा सकता होता, तो आज इन कुछ तथाकथित अनुयायियों के द्वारा इस्लाम की वो गत दुनियाभर में नहीं की गई होती, जिसका गवाह समय-समय पर यह विश्व बनता आया है ! अभी कुछ दिनों पहले ही यह खबर आई थी कि २६/११ के मुंबई के आतंकी हमलों का मुख्य आरोपी हाफिज सईद, पाकिस्तानियों के तथाकथित कश्मीर एकजुटता दिवस के दिन लाहोर में एक बार फिर से भारत के खिलाफ अपनी गंदी जुबान से गीदड़ भभकियां देता ...

कार्टून कुछ बोलता है-वेलेंटाइन तोहफा !

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कार्टून कुछ बोलता है- विदेश मंत्री की सफाई !

विदेश मंत्री कृष्णा ने संयुक्त राष्ट्र संघ में भारत की बजाये पुर्तगाल के मंत्री का भाषण पढ़ा ! अरे, आलोचना करने के बजाय मेरा शुक्रिया अदा करो कि मैंने पुर्तगाल के मंत्री का ही भाषण पढ़ा, वरना मेरे आगे टेबल पर तो पाकिस्तान और चीन के मंत्रियों के भी भाषण पड़े हुए थे !

पीच्ची !

माय डियर पीच्ची ; पहचान गई न ? तुम्हे मुझसे अक्सर यह शिकायत रहती थी कि मैं क्यों जानबूझकर तुम्हारे नाम को गलत उच्चारित करता हूँ। और देखो, आज भी वही गुस्ताखी फिर से दुहरा दी है मैंने, हा-हा॥ किन्तु तुम्हारे इस गिले-शिकवे को कि "तुम ये क्या पिच्ची-सिच्ची करते रहते हो, मुझे मेरे सही नाम से क्यों नहीं पुकारते ", मैं अब और पेंडिंग नहीं रखना चाहूँगा, क्या पता फिर कभी मुझे तुम्हे एक्सप्लेन करने का मौक़ा मिले, न मिले। हे ! किन्तु प्रोमिस करो कि तुम इसका मीनिंग जानकार मुझे मन ही मन बुरा-भला नहीं कहोगी। पीच्ची शब्द हमारे आंध्रा में तेलगु भाषा में किसी को पागल कहने के लिए प्रयुक्त किया जाता है। तुम्हारी कॉलेज के दिनों की हरकतों को देखकर ही मैं तुम्हे इस तरह से सम्बोद्धित करता था। उस वक्त तो इसे सुनकर तुम बुरा मानती थी, लेकिन आई एम् स्योर, इस वक्त पीच्ची का यह ख़ूबसूरत सा अर्थ जानकार तुम्हारे उस शोभायमान चेहरे पर जरूर अब तक एक लम्बी-चौड़ी मुस्कान दौड़ गई होगी। अब तुम्हे यह भी आश्चर्य अवश्य ही हो रहा होगा कि मुझे तुम्हारा इ-मेल पता मिला कहाँ से ? जैसा कि मैंने पहले कहा, आज मैं तुम्हे किसी ...

कार्टून कुछ बोलता है !

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इश्क जिस रोज हुस्न की मजबूरी समझ लेगा !

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इश्क जिस रोज हुस्न की मजबूरी समझ लेगा, प्रेम उस रोज अपनी तपस्या पूरी समझ लेगा। छलकते लबों से कभी कोई तबस्सुम न बहे, पैमाना प्यार का इसको  रूरी समझ लेगा।  मन ख्वाइशों को मचलने की गुंजाइश न दे, पलकें झुकाना भी हवस मंजूरी समझ लेगा।  तसदीक प्यार में हुस्न, अंजाम से क्या डरे, धड़कन जवाँ दिलों की हर दूरी समझ लेगा।  हुस्न जागता रहे  अगर  इंतज़ार-ए-इश्क में, प्रीत की  गजल 'परचेत', अधूरी समझ लेगा।

ऋतुराज वसंत !

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प्रकृति छटा सुशोभित अनंत है, आया फिर ऋतुराज वसंत है ! कोंपल कुसुम सुगंधित वन है, समीर सृजन शीतल पवन है ! मंद-सुगंध सृजित वात-बयार है, सुर्ख नसों मे हुआ रक्त संचार है ! हर सहरा ओढे पीत वसन है, जीवंत भया अभ्यारण तन है ! दरख्तों पर खग-पंछी शोर है, कोमल सांस कशिश पुरजोर है! ठिठुरी शीत सब कुछ भूली है, खेत सुमुल्लसित सरसों फूली है ! सफ़ल शीतल  सूर्य साधना है,  श्रीपंचम पर सरस्वती अराधना है ! फ़ैली फिजा मे सुगंध  खास है, खारों मे भी लहराता मधुमास है ! सुरम्यं  वादियों का यही आदि-अंत है, आया  फिर से ऋतुराज वसंत है !

Day-dream !

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I don't mind a little immaturity, when my mind stumble like a buffoon.  It's neither political or social, nor a scurrilous lampoon. Frankly speaking, I got fed up with this distressed world, thus, I'm gonna float a trillion dollar tender in the market soon. I'm willing to construct a fly-over, from earth to moon. Your cooperation in this regard is highly solicited. you might like it too!

विनय, रब से !

जिन्दगी कोई पहेली न बने, इसलिए सही  से डिफाइन किया करो , सबकी तमन्ना पूरी हो, आरजू न किसी की डिक्लाइन किया करो।   परेशां हो  क्यों  भला कोई भी यहाँ जीवन के अपने लम्बे सफ़र में, विनती है या रब,सभी के मुकद्दर को ढंग से डिजाइन किया करो। खुशियाँ पाने को,आपसे दुआ मांगने की लत पड़ गई है लोगों को , आग्रह है कि बिन मांगे ही,खुद ही  खुशियाँ कन्साइन किया करो।   याचना करता है 'परचेत' इस मेले में कोई अपनों से न बिछड़े , और बिछड़े हुए को आप  उसके अपनों से कम्बाइ न किया करों।  

हमारी खुशकिस्मती कि अभी भी दो विकल्प मौजूद है हमारे पास !

देश में दिन-प्रतिदिन बिगडती क़ानून व्यवस्था की स्थित व लोगो में बढ़ती असुरक्षा की भावना, महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार के खिलाफ छिड़ी मुहिम एक बड़ी क्रांति का रूप धारण कर लेगी, ऐसा शायद ट्यूनीशिया और मिस्र के शासकों ने सपने में भी नहीं सोचा होगा। ट्यूनीशिया और मिस्र का जनविद्रोह यह दर्शाता है कि अब सत्ता का सुख भोगने वाले लोग अधिक दिनों तक जनता की जुबान बंद करके नहीं रख सकते। हालांकि यह विद्रोह लम्बे समय से अपेक्षित था, मगर नए साल के प्रथम माह में ही यह ज्वालामुखी बनकर फूट पडेगा, बड़े-बड़े भविष्यवेदाओं ने भी नहीं सोचा होगा। बाहर वाले के लिए, या फिर हमारे खुद के द्वारा ही जग दिखावे के लिए, हम भले ही दुनिया की दूसरी बड़ी ताकत बनने के पथ पर अग्रसर हो, मगर आतंरिक सच्चाई यह है कि अपना यह देश फिलहाल महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार की मार से जर्जर अवस्था में है। क़ानून और व्यवस्था दिन-प्रतिदिन बिगड़ रही है, असामाजिक तत्व खुले घूम रहे है। प्रशासनिक कुव्यवस्था की वजह से देश ने पिछले कुछ सालों से महंगाई, भ्रष्टाचार और बेरोजगारी के नाम पर क्या नहीं देखा? बेरोजगारी का तो आज का ही ताजा उदाहरण हमारे सम...