...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
दस्तूर
जिंदगीभर पकते रहे यह सुनते-सुनते कि नेगेटिव नहीं हमेशा पौजेटिव सोचो, काश कि जमाने को अस्पताल का यह दस्तूर भी पता होता कि नेगेटिव आए तो सही...
-
नोट: फिलहाल टिप्पणी सुविधा मौजूद है! मुझे किसी धर्म विशेष पर उंगली उठाने का शौक तो नहीं था, मगर क्या करे, इन्होने उकसा दिया और मजबूर कर द...
-
ये दिल निसार करके जाना कि राहे जफा होते है लोग, सच में, हमें मालूम न था कि यूं भी बावफा होते है लोग ! सोचते थे कि नेमत है खुदा की य...
-
तमाम जंगल के बीहड़ों में जो कुछ घटित हो रहा हो, उससे क्या उस जंगल का राजा अंविज्ञ रह सकता है? या फिर यूं कहा जाए कि यदि उसे उसके राज्य मे...

आखिर बाप तो बाप है!
ReplyDeleteकुँवर जी,
हा हा ... सही शिक्षा दे रहे हैं बाप जी ...
ReplyDelete:)
ReplyDelete--- शायद आपको पसंद आये ---
1. Advance Numbered Page Navigation ब्लॉगर पर
2. ग़ुबार साफ़ करो आईने की आँखों से
3. तख़लीक़-ए-नज़र
:-))
ReplyDeleteबिल्कुल सही. अब डर डरकर अपराध करने में क्या मजा?
ReplyDeleteघुघूतीबासूती
हा हा हा ! बढ़िया मारा है .
ReplyDeleteआपकी ड्राइंग अच्छी है गोदियाल जी .
ड्राइंग तो अच्छी है ही कटाक्ष भी जोरदार है। वाह!
ReplyDelete