यूं भी बावफा होते है लोग !
ये दिल निसार करके जाना कि राहे जफा होते है लोग, सच में, हमें मालूम न था कि यूं भी बावफा होते है लोग ! सोचते थे कि नेमत है खुदा की ये जज्बा , इल्म न था कि वफ़ा की कस्मे खाने वाले, इस कदर बेवफा होते है लोग ! दिल और आँख का ऐसा आपसी देखा जो समन्वय 'परचेत', नजर देखे, दिल शकूं पाए, मनीषी ऐसे ही नफ़ा होते है लोग !

आखिर बाप तो बाप है!
ReplyDeleteकुँवर जी,
हा हा ... सही शिक्षा दे रहे हैं बाप जी ...
ReplyDelete:)
ReplyDelete--- शायद आपको पसंद आये ---
1. Advance Numbered Page Navigation ब्लॉगर पर
2. ग़ुबार साफ़ करो आईने की आँखों से
3. तख़लीक़-ए-नज़र
:-))
ReplyDeleteबिल्कुल सही. अब डर डरकर अपराध करने में क्या मजा?
ReplyDeleteघुघूतीबासूती
हा हा हा ! बढ़िया मारा है .
ReplyDeleteआपकी ड्राइंग अच्छी है गोदियाल जी .
ड्राइंग तो अच्छी है ही कटाक्ष भी जोरदार है। वाह!
ReplyDelete