परिवेश

अफसोस, कि अब ये
कैसा ज़माना आ रहा है,
बोलने को तो गद्दार 
भूख हड़ताल पर बैठे हैं 
मगर, आनलाइन 
विदेशों से
वास्ते उनके, खाना आ रहा है।



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