...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
आगाज़ - 2026 !
वर्ण आखिरी, वैश्य, क्षत्रिय, विप्र सभी, सनातनी नववर्ष का जश्न मनाया कभी ? नहीं, स्व-नवबर्ष के प्रति जब व्यवहार ऐसा, फिर पश्चिमी नवबर्ष पर...
-
नोट: फिलहाल टिप्पणी सुविधा मौजूद है! मुझे किसी धर्म विशेष पर उंगली उठाने का शौक तो नहीं था, मगर क्या करे, इन्होने उकसा दिया और मजबूर कर द...
-
देशवासियों तुम हमें सत्ता देंगे तो हम तुम्हें गुजारा भत्ता देंगे। सारे भूखे-नंगों की जमात को, बिजली-पानी, कपड़ा-लत्ता देंगे। ...
-
स्कूटर और उनकी पत्नी स्कूटी शहर के उत्तरी हिस्से में सरकारी आवास संस्था द्वारा निम्न आय वर्ग के लोगो के लिए ख़ासतौर पर निर्म...
बहुत ख़ूबसूरत.
ReplyDeletehttp://bulletinofblog.blogspot.in/2012/03/5.html
ReplyDeleteबहुत सुंदर...
ReplyDeleteहाँ, अब बाँसुरी कम, नगाड़ा अधिक बजता है।
ReplyDeleteसही कहा, यही पहचान हो गई है.
ReplyDeleteAAJ TO YUG HI ESKA HAE JO JITNA HALLA MACHAYEGA UTNA HI ATTENTION PAYEGA
ReplyDeleteSACHMUCH BAHUT HI SARTHAK RACHNA
सटीक व्यंग ।
ReplyDeleteकरार व्यंग ...
ReplyDelete·म शब्दों में अधि· और सारगर्भित बात।
ReplyDeleteकम शब्दों में अधिक और सारगर्भित बात।
ReplyDeletesateek prastuti..
ReplyDelete