Sunday, November 11, 2012

धन-ते -रस !










कहीं सफ़ेद तो 
कहीं काली कमाई की हबस !
धनाड्यों के धन-ते-रस !!

सडक,गली-मुहल्लों में 
ख़ासा जाम, 
जो जहां खडा 
घंटों हो न पाया,  
वहाँ से टस-से-मस !   
धनाड्यों के इस धन-ते-रस !!  

देश में कहने को 
यूं तो मंदी है,
शहर में तमाम  
बो-हवा भी गंदी है,
चार चाँद लगे मगर  
बुलियन बाजार को, 
खरीददार मिला जब 
ढाई करोड़ के  
हीरों के हार को,  
मिंयाँ,  बीबी को 
कर न पाया बस !  
धनाड्यों के इस धन-ते-रस !!

छवि गूगल से साभार !

7 comments:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    त्यौहारों की शृंखला में धनतेरस, दीपावली, गोवर्धनपूजा और भाईदूज का हार्दिक शुभकामनाएँ!

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  2. धनतेरस को आपको बधाई --------
    वैसे तो आपकी प्रस्तुति तो हमेसा है समाज का प्रतिबम्ब दिखाती है, जेकिन आज तो देश का प्रतिबिम्ब ही सामने हो गया . बहुत सुन्दर कबिता के माध्यम से अच्छी प्रस्तुति.

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  3. धनाढ्यों के धनतेरस के चलते आम आदमी की क्या औकात ।

    दीपावली की शुभ कामनाएं ।

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  4. bahut sateek vivran ! asli dhanteras to kali kamayi walo ka hi hai !

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  5. || श्री ||

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  6. बहुत बढिया । आपको दीपावली की शुभकामनायें

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  7. सच कहा, उनको धन से रस मिलता है..

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परिभाषा

कुछ दर्द ऐसे भी होते हैं कि जो फटते नहीं, फासले अगर बढ़ने लगें तो फिर घटते नहीं।