बिन पिए और बिना कुछ कहे,
आज वो चुपचाप सो गया है,
लगता है जिंदगी का खज़ाना
'परचेत', अब खत्म हो गया है।
...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
सच बोलने का फलसफा कुछ ऐसा मिला 'परचेत', कि किसी ने भी बढ़कर कभी गले नहीं लगाया।
हा हा
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