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सबके सब बिन पैंदे के लोटे हो गए है !

आज तुम्हारे वतन में, अच्छे लोगो के टोटे हैं, पैंदे सबके सब घिस गये, बिन पैंदे के लोटे हैं,  कोई लल्लू बनके लुडके,कोई चिकना मुलायम, साम्यनिर्धन हिताषियों के तो, कर्म ही खोटे हैं। शोषित की तो यहां पर, 'माया' ही निराली है, धन लोभियों के दिल सफ़ेद, काया काली है, अनाज उगाने वाले, हैं कुपोषण के शिकार, चारा, तोप खाने वाले, गैडे की भांति मोटे हैं। जनप्रतिनिधि,सिपैसलार व्यस्त चीर हरण में, चाटुकार लमलेट हैं, 'पास्तामाता' के चरण में, उल्लू एकदम ही सीधे हुए,तलवे चाट चाटकर, घर व उदर तो इनके बड़े हो गए, दिल छोटे हैं। फतवे बेचते, धर्म की भट्टी पे आग तापने वाले, एक और बाबरी ढूढ़ रहे, रामराग अलापने वाले, बुद्दिजीबी युवा के लिए, जीवन प्रतियोगिता है, हकदार का हक़ मारने को, रिजर्वेशन कोटे है। गांधी तुम्हारे वतन में, अच्छे लोगो के टोटे हैं, पैंदे सबके सब घिस गये, बिन पैंदे के लोटे हैं।

क्या इसे माओवादी और नक्सली कृत्य तक ही समेट लेना उचित होगा ?

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आज तडके हावडा -कुर्ला लोकमान्य तिलक ज्ञानेश्वरी सुपर डीलक्स एक्सप्रेस, जोकि महाराष्ट्रा जा रही थी, के १३ डिब्बे आतंकवादियों द्वारा जगराम से १३५ किलोमीटर दूर खेमसोली और सर्दिया रेलवे स्टेशनों के बीच तडके १:३० बजे रेल पटरी पर किये गए ब्लास्ट की वजह से दुर्घटनाग्रस्त हो गए, जिसमे अपुष्ट ख़बरों के मुताविक अब तक ७० से अधिक यात्रियों के मारे जाने और करीब २०० के घायल होने की खबर है! इस घटना का एक दुखद पहलू यह भी रहा कि १३ डिब्बों में से ५ डिब्बे बगल वाली उस पटरी पर गिर गए जिस पर एक मालगाड़ी आ रही थी, और फिर वह भी इन डिब्बो से भिड गई! हालांकि इस दुर्घटना की जिम्मेदारी पीसीपीए नाम के एक मावो समर्थित गुट ने घटनास्थल पर दो बैनर छोड़कर ली है, मगर मैं समझता हूँ कि इस घृणित कार्यवाही को इतने हलके में लेना उचित नही होगा! 'हलके में लेना' शब्द इसलिए इस्तेमाल किया है क्योंकि नक्सली और माओवादी घटनाएं तो हमारे सरकार के लिए हल्की-फुल्की बाते ही बनकर रह गई है ! एक-विभाग किसी दूसरे विभाग के ऊपर दोष मड देगा, प्रधानमंत्री जी और रेलमंत्री जी दुर्घटना पर खेद व्यक्त कर लाख पचास हजार का मुआवजा लोगो का मुह बं...

हकीकत-ए-शहंशाह !

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आज सुबह मेल चेक कर रहा था तो इस मेल पर भी नजर गई ! सोचा, थोडा इसमें तोड़-फोड़कर आपका भी मनोरजन किया जाये ! तो लीजिये, परिवार संग (सिर्फ पति-पत्नी ) मिल-बैठकर एन्जॉय कीजिये ; हो सकता है कि आप दुनिया के राजा हों ! ये भी हो सकता है कि आप दुनिया में सबसे खतरनाक किस्म के प्राणी हों ! या दुनिया वालों के सामने जबरदस्ती शेर बनने की कोशिश करते हों ! होसकता है कि आप आजाद किस्म के मनमौजी हों ! हो सकता है कि आप दूसरों को अपनी मुट्ठी में रख उनपर हुक्म चलाते हो ! हो सकता है कि दूसरे लोग आपको बहुत प्यार करते हों ! ये भी संभव है कि आप सज्जन किस्म के हों ! या फिर एक खतरनाक हत्यारे हो ! लेकिन सच्चाई यही है कि . . . . . . . . . . . . . जब आप अपने घर में होते है तो .... . . . . . .. . . . . . .. . . . . . . . . . . बीबी-बीबी होती है ...Does not matter Who the Hell you are ...

२२ साल पुराना गौमुख यात्रा वृतांत !

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 गौमुख के आगे की तस्वीर ( मैं और विपिन सोनी ) सामने वह बर्फ का ग्लेशियर है  गंगोत्री मंदिर के ठीक आगे सीडियों में बैठे हम लोग रास्ते में सुस्ताते हुए गौमुख के रास्ते में श्रीनिवास , मैं और सोनी मानचित्र पर किल्क कीजिये अभी चंद रोज पहले मैंने एक लेख ज्योतिषी और भविष्य बाणी से सम्बंधित लिखा था! और जिसमे मैंने गलती से यह दावा कर दिया था कि मैं लगभग सभी विषयों पर लिख चुका हूँ ! लेकिन बाद में घुमक्कड़ी के चैम्पियन , मस्तमौला श्री नीरज जाट जी की एक टिपण्णी प्राप्त हुई , जिसमे उन्होंने मेरे दावे को यह कहकर ख़ारिज कर दिया था कि आपने घुमक्कड़ी पर कुछ भी नहीं लिखा! बाद में मैंने भी रिअलाइज किया कि वास्तव में अभी बहुत से ऐसे क्षेत्र है, जिनको हमने छुआ ही नहीं ! नीरज जी से वादे के हिसाब से आज एक पोस्ट घुमक्कड़ी पर लगा रहा हूँ ! चूँकि यह करीब २२ साल पुरानी बात है, और एल्बम को टटोलने पर जो फोटो मेरे हाथ लगे, उन्हें यहाँ लगा रहा हूँ, हालांकि तस्वीरे पुरानी होने की वजह और कैमरे की गुणवत्ता के हिसाब से बहुत साफ़ नहीं है! फिर भी उम्मीद करता हूँ कि आप थो...

"26/11 के अपराधी बनाम मलियाना हाशिमपुरा के दोषी" - क्या यही उच्च सोच है ?

एक तरफ २६/११ का मुंबई हमला, जिसे एक विदेशी मुल्क ने बड़े ही सुनियोजित ढंग से इस देश पर किया था! और एक तरफ मई १९८७ का मेरठ साम्प्रदायिक दंगा, जिसकी शुरुआत कैसे हुई थी, उसका वर्णन उन दंगो के दौरान दी गई रिपोर्टो में दी गई थी, चंद शुरुआती लाइने आप खुद पढ़ लीजिये ; "The Beginning of the Tragedy Large scale rioting began in the early hours of May 19, 1987 and the maximum damage was done just in course of a few hours. On that fateful morning, thousands of people, already incited by inflammatory speeches and slogans broadcast over public address system in mosques, barricaded the national highway, burnt 14 factories, hundreds of shops and houses, vehicles, and petrol pump, and cast scores of people into flames. The sporadic Hindu reaction was revengeful. Meerut continued in flames between May 19 and May 22, with murder, loot, explosions, and wild rumours further fuelling violence. " उपरोक्त चंद लाइनों से ही यह स्पष्ट हो जाता है कि उस साम्प्रदायिक दंगे की जड़ कहाँ थी? मैं व्यक्तिगत तौर...

कहाँ ले जाना चाहते हो देश को ?

आपको नहीं लगता कि हमारे प्रधानमंत्री के पास अब बोलने के लिए भी कुछ नहीं बचा? जो इंसान खुद दूसरों की कृपा पर निर्भर हो , वह देश को क्या ख़ाक आत्मनिर्भर बनाने के सपने दिखाएगा? वे कहते है कि मैं तो रिटायर नहीं होना चाहता, मगर यदि राहुल जी आना चाहेंगे तो में रिटायर हो जाउंगा ! आत्मसम्मान तो मानो जैसे इन्होने कहीं पोटली में बांधकर किसी गहरे सूखे कुंए में डाल दिया हो! ईमानदारी का चोला ओढने वाला कोई शख्स अगर अपने उस मंत्री का बचाव कर रहा हो, जिसने सीधे-सीधे देश को ६० हजार करोड़ का चूना लगा दिया हो, तो वह कैसा ईमानदार ? अगर देखा जाए तो यह जो गठबंधन सरकारों का दौर इस लोकतंत्र में आया है, वह राजनीति में भ्रष्ट लोगो के लिए एक वरदान की तरह है! राजनेता का पिछले सत्र में कैसा भी चरित्र और व्यावहारिक रिकॉर्ड रहा हो, बस वह दो-चार अपने गुंडे-मवालियों के साथ जीतकर सदन में पहुच जाए, उसके बाद सत्ता की मलाई उसके मुह पर होती है! किसी की भी कोई प्रत्यक्ष जिम्मेदारी नहीं, हर कोई मजबूरी और एक दूसरे पर दोषारोपण करता है! और कौंग्रेस जैसी पार्टिया ऐसे मौकों पर गठबंधन सरकारों की मजबूरियों की दुहाई देकर वह सब कर रही...

यूं भी बावफा होते है लोग !

ये दिल निसार करके जाना  कि राहे जफा होते है लोग, सच में, हमें मालूम न था  कि यूं भी बावफा होते है लोग ! सोचते थे कि नेमत है  खुदा की  ये जज्बा , इल्म न था कि  वफ़ा की कस्मे खाने वाले,  इस कदर बेवफा होते है लोग ! दिल और आँख का  ऐसा आपसी  देखा जो समन्वय 'परचेत', नजर देखे, दिल शकूं पाए,  मनीषी ऐसे ही नफ़ा होते है लोग !