मानसून का जोर,
मूसलाधार बारिश,
आंधी और तूफान बहुत हैं,
पकडी है जो राह तूने
जिस डगर चला रहा है तू
अपनी कश्ती, याद रखना,
उस डगर मे उफ़ान बहुत हैं।
...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
नाम सूरत और शहर की ऐसी सूरत, आ जाते हैं, मुंह उठाके ज़रूरत बे-ज़रूरत, मशहूर हो जाने की ख़्वाहिश है मगर, चराग ढूंढे है फिर भी 'परचेत...
सुंदर
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ReplyDeleteआपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" बुधवार 1 जुलाई 2026 को साझा की गयी है......... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!
अपनी कश्ती, याद रखना
ReplyDeleteकश्ती highjack हो रही
याद रखना जरूरी
बहुत सुंदर
ReplyDelete🙏🙏
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