Tuesday, May 25, 2010

कहाँ ले जाना चाहते हो देश को ?

आपको नहीं लगता कि हमारे प्रधानमंत्री के पास अब बोलने के लिए भी कुछ नहीं बचा? जो इंसान खुद दूसरों की कृपा पर निर्भर हो , वह देश को क्या ख़ाक आत्मनिर्भर बनाने के सपने दिखाएगा? वे कहते है कि मैं तो रिटायर नहीं होना चाहता, मगर यदि राहुल जी आना चाहेंगे तो में रिटायर हो जाउंगा ! आत्मसम्मान तो मानो जैसे इन्होने कहीं पोटली में बांधकर किसी गहरे सूखे कुंए में डाल दिया हो! ईमानदारी का चोला ओढने वाला कोई शख्स अगर अपने उस मंत्री का बचाव कर रहा हो, जिसने सीधे-सीधे देश को ६० हजार करोड़ का चूना लगा दिया हो, तो वह कैसा ईमानदार ?

अगर देखा जाए तो यह जो गठबंधन सरकारों का दौर इस लोकतंत्र में आया है, वह राजनीति में भ्रष्ट लोगो के लिए एक वरदान की तरह है! राजनेता का पिछले सत्र में कैसा भी चरित्र और व्यावहारिक रिकॉर्ड रहा हो, बस वह दो-चार अपने गुंडे-मवालियों के साथ जीतकर सदन में पहुच जाए, उसके बाद सत्ता की मलाई उसके मुह पर होती है! किसी की भी कोई प्रत्यक्ष जिम्मेदारी नहीं, हर कोई मजबूरी और एक दूसरे पर दोषारोपण करता है! और कौंग्रेस जैसी पार्टिया ऐसे मौकों पर गठबंधन सरकारों की मजबूरियों की दुहाई देकर वह सब कर रही है, होने दे रही है, जो देश के लिए घातक सिद्ध हो रहा है, या फिर आगे चलकर घातक सिद्ध होगा ! सवाल यह है कि क्या बहुमत के लिए गठबंधन की आड़ में इन्हें वो सब करने दिया जाये ?

वैसे तो मैं भी जानता हूँ कि मेरा यहाँ इसतरह का सुझाव कोई मायने नहीं रखता, फिर भी कहना चाहूंगा कि अभी भी अगले आम चुनाव के लिए ४ साल का वक्त है और अगर देश का जागरूक नागरिक इस सरकार को चुनाव सुधारों के लिए संविधान में कुछ सशोधन करने को मजबूर करे तो निश्चित तौर पर आगे चलकर यह देशहित में होगा ! क्योंकि आज भ्रष्टाचार की जड़ ऐसी बन गई है कि कोई भी चोर-उचक्का अपने दो चार सदस्य लेकर सरकार में शामिल हो जाता है और फिर मनमानी करता है ! इसे रोकना होगा, वरना यह देश के लिए बहुत घातक सिद्ध होगा! कोई आमूलचूल परिवर्तन की जरुरत नहीं, बस करना सिर्फ इतना है कि संविधान में निम्नलिखित व्यवस्थाये हों ;
१. चुनाव पश्चात कोई भी गठबंधन बनाने पर रोक
२.राष्ट्रपति का चुनाव भी जनता के द्वारा और उसी समय पर जबकि देश में आम-चुनाव हो रहे हो !
३. अधिकतम 4 पार्टियों के बीच चुनावी संघर्ष !
४. यदि कोई भी दल सदन में निर्धारित बहुमत लाने में विफल रहता है तो सरकार उस दल की बनेगी जिसका राष्ट्रपति चुना गया हो, और वह सरकार राष्ट्रपति प्रणाली की तरह राष्ट्रपति ही चलाएगा, यदि किसी दल को पूर्ण बहुमत मिल जाता है तो वह मौजूदा संसदीय प्रणाली के हिसाब से प्रधानमंत्री के अधीनस्थ सरकार चला सकती है! लेकिन चुनाव के बाद कोई भी गठबंधन बना कर सरकार चलाने का दावा नहीं कर सकता !
५. यही सब बातें राज्य सरकारों पर भी लागू हों !
६. आज अपने को जिम्मेदारी से बचने के लिए बहुत सी बाते राज्य सरकारों पर छोड़ दी जाती है और देश का मुखिया साफ़ बच निकलता है !
राज्यों और स्थानीय निकायों से कुछ अधिकार केंद्र को वापस लेने चाहिए क्योंकि यह देखा गया है कि उनका ठीक इस्तेमाल नहीं हुआ ! ऐसी व्यवस्था के जाने चाहिए कि हर नागरिक की सुरक्षा और रहन-सहन की जिम्मेदारी देश के मुखिया की हो !

अंत में यही कहूँगा कि अगर देश को सही दिशा देनी है तो जागो देशवासियों जागो ! अभी हाथ में चार साल का वक्त है !

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24 Comments:

Blogger डॉ. महफूज़ अली (Dr. Mahfooz Ali) said...

काश! आपके द्वारा मेंशन की हुई सारी व्यवस्थाएं ...हमारे संविधान में हो.... बहुत अच्छी लगी आपकी यह पोस्ट...

Tuesday, 25 May, 2010  
Blogger Unknown said...

गोदियाल जी आपके सुझाव बहुत अच्छे हैं पर देशविरोधी इन्हें मानने वाले नहीं इसीलिए हमें लगता कि सैनिक शाशन ही एकमात्र विकलप है।
आपका लेख आपके मन में देशहित की दहक रही ज्वाला को दिखाता है।

Tuesday, 25 May, 2010  
Blogger दिलीप said...

aapki baaton se sehmay hun aur sath hi sath vote me inme se koi nahi ka bhi vikalp diya jaaye jiski sankhya jyada hone par ummeed var badal kar dubara chunav kiye jaaye...waise yah pravdhan hamare samvidhaan me hai..par ham anbhigy hain...

Tuesday, 25 May, 2010  
Blogger kunwarji's said...

जागेंगे जी जरूर जागेंगे!

बचे है पूरे चार साल.

देख आज देश का हाल और

आप जैसे विद्वानों की लेखनी का कमाल

जरूर जागेंगे!

कुंवर जी,

Tuesday, 25 May, 2010  
Blogger drsatyajitsahu.blogspot.in said...

जागो देशवासियों जागो
jai hind

Tuesday, 25 May, 2010  
Blogger Udan Tashtari said...

काश!! आपकी आवाज सुन कर लोग जागें.

Tuesday, 25 May, 2010  
Blogger अनुनाद सिंह said...

मनमोहन सिंह नहीं, 'म्याऊ-म्याऊ सिंह' कहिये।

Tuesday, 25 May, 2010  
Blogger DR. ANWER JAMAL said...

4th Vote n Nice Post .रचनाएं अपने रचनाकार का परिचय कराती हैं ।
http://blogvani.com/blogs/blog/15882

Tuesday, 25 May, 2010  
Blogger honesty project democracy said...

हमारा मानना है की हम लोग भी दोषी है साडी व्यवस्था के सड़ जाने में / अब भी वक्त है अगर हमलोग मिलकर प्रयास करें तो स्थिति को बदला जा सकता है / ये कहाँ ले जायेंगे इनका तो काम ही है नरक में धकेलने का /

Tuesday, 25 May, 2010  
Blogger DR. ANWER JAMAL said...

4th Vote n Nice Post .रचनाएं अपने रचनाकार का परिचय कराती हैं ।
http://blogvani.com/blogs/blog/15882

Tuesday, 25 May, 2010  
Blogger Unknown said...

1) सभी लोकसभा उम्मीदवारों हेतु न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता आवश्यक हो।
2) मतों का "वेटेज" भी अलग-अलग हो, जैसे पढ़े-लिखे का वोट 4 वोट बराबर, अनपढ़-नशेड़ी-डाकू इत्यादि के वोट मात्र 1 बराबर :)

Tuesday, 25 May, 2010  
Blogger शिवम् मिश्रा said...

बहुत सही सुझाव दिए है आपने पर अफ़सोस है कि कोई भी सुझाव अमल में नहीं लाया जायेगा ...................जब जब चुनाव होते है यह सब बाते अपने आप विलुप्त हो जाती है हम सब के दिमाग से ..........शायद कोई जादू सा चल जाता है हम पर चनावो में !

Tuesday, 25 May, 2010  
Blogger संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बहुत अच्छे सुझाव हैं....जागरूक करती हुई पोस्ट...अब पानी सिर के ऊपर से गुज़र गया है...अब तो सच ही जाग जाओ...

Tuesday, 25 May, 2010  
Blogger राज भाटिय़ा said...

देशवासियों अभी भी जागरुक हो जाओ...

Tuesday, 25 May, 2010  
Blogger Rohit Singh said...

बाते तो सही हैं. राष्ट्रीय सरकार भी चल सकती है।
हमारे देश में इतनी विविधता है कि सब को एक ही सोच से संचालित हो सकें संभव नहीं है। आपकी सारी राय बेहद ही उचित हैं।

जहां तक राज्यों को मिले अधिकार की बात है, तो उस पर केंद्र चाहे तो उस पर अंकुश लगा सकता है। पर केंद्र इतना कमजोर है कि उसकी हिम्मत नहीं होती राज्यों में दखल देने की।
अब तक अगर दिया भी है तो विरोधी दल की सरकार को गिराने के लिए या तंग करने के लिए। .....जब नक्सली हमले में सीआरपीएफ पिटी तो कहा जाने लगा है कि पुलिस मदद नहीं करती, सुरक्षा राज्यों का विषय है..देश के गंहमंत्री सीमित अधिकार की बात करते हैं.
1.कई संवैधानिक रास्ते हैं जिस से आसानी से राज्यों को कंट्रोल किया जा सकता है।
2.राजनीतिक इचछाशक्ति हो तो सही।
3.सत्ता में आने के लिए राज्यों के टुकड़े हो रहे हैं पर कोई कुछ बोलता नहीं। जनता आगे आती नहीं

Wednesday, 26 May, 2010  
Blogger भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

मतदान स्वैच्छिक नहीं बल्कि अनिवार्य होना चाहिये. वैसे राज्य सरकारों की आवश्यकता है क्या?

Wednesday, 26 May, 2010  
Blogger SANJEEV RANA said...

"काम का ना काज का
ना अपनी ही आवाज का
वो तो मानो संगीत हैं किसी दूसरे के साज का
प्रधानमंत्री हैं बस नाम का
कमाल हैं ये सोनिया के हाथ का "

Wednesday, 26 May, 2010  
Blogger vandana gupta said...

kash kanoondano ke kano tak bhi ye bat pahuche.

Wednesday, 26 May, 2010  
Blogger arvind said...

KATHAPUTALI.....देशवासियों जागो .

Wednesday, 26 May, 2010  
Blogger संजय भास्‍कर said...

.अब तो जाग जाओ.......

Wednesday, 26 May, 2010  
Blogger Smart Indian said...

आपकी बातों से ज़्यादातर सहमत ही हूँ. कांग्रेस क्या अधिकाँश राजनैतिक पार्टियां व्यक्तिवादी ही हैं. वैसे प्रशासन हर स्तर पर हो मगर निकम्मा न हो.

Wednesday, 26 May, 2010  
Blogger ajay saxena said...

सुझाव बहुत अच्छा है..अच्छी लगी आपकी यह पोस्ट...

Wednesday, 26 May, 2010  
Blogger VICHAAR SHOONYA said...

बेहतरीन सुझाव दिए हैं अपने. बहुत बढ़िया लेख.

Wednesday, 26 May, 2010  
Blogger ... said...

i agree with u

Thursday, 27 May, 2010  

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