प्रणय गीत- तुम मिले !
कातिब-ऐ-तकदीर को मंजूर पाया,
तस्सवुर में तुम्हारा हसीं नूर पाया।
(कातिब-ऐ-तकदीर=विधाता) (तस्सवुर में = ख्यालों में )
तस्सवुर में तुम्हारा हसीं नूर पाया।
(कातिब-ऐ-तकदीर=विधाता) (तस्सवुर में = ख्यालों में )
बिन पिए ही मदमस्त हो गए हम,
तरन्नुम में तुम्हारे वो सुरूर पाया।
(तरन्नुम= गीत )
तरन्नुम में तुम्हारे वो सुरूर पाया।
(तरन्नुम= गीत )
कुछ बात है हममे, जो हमें तुम मिले,
मन में पलता इक ऐंसा गुरुर पाया।
मन में पलता इक ऐंसा गुरुर पाया।
सेहर हसीं और शामे रंगीं हो गई,
तुमसा जब इक अपना हुजूर पाया।
(सेहर = सुबह )
तुमसा जब इक अपना हुजूर पाया।
(सेहर = सुबह )
जब निहारने नयन तुम्हारे हम गए,
उन्हें प्यार के खुमार में ही चूर पाया ।
उन्हें प्यार के खुमार में ही चूर पाया ।
बेकस यूँ लगा, खो गई महक फूल की,
तुमको जब कभी अपने से दूर पाया।
(बेकस = अकेला )
तुमको जब कभी अपने से दूर पाया।
(बेकस = अकेला )
Labels: My lyrics

19 Comments:
waah!
lajawab prastuti...
shabdo ke arth sath-sath dene ke liye dhhanyawad...
kunwar ji
वाह! बहुत खूब लिखा है...
बहुत सुन्दर
Interesting..
बहुत सुन्दर हमेशा की तरह.
वाह वाह गोदियाल जी ।
बहुत सुन्दर प्रेम राग है ।
क्या उर्दू में कोई कोर्स कर लिया है ! :)
डा० साहब, तमन्ना तो बहुत थी सीखने की, मगर उर्दू पढनी आती नहीं, हाँ आजकल उर्दू की एक डिक्शनरी ( रोमन इंग्लिश में ) हाथ लगी है, "Intekhab-O-Lughat" उसे पढ़ रहा हूँ :) आप भी इस लिंक पर पढ़ सकते है ;
http://www.learningurdu.com/urdudictionary.asp
bahut sunder rachna ...
बहुत खुबसूरत ग़ज़ल हर शेर लाजबाब , मुबारक हो
तेरा आना..मन के सब फूलों का खिल जाना..
bahut hi badhiyaa
बहुत खूब
waah kya baat hei....sharab se jyada nasha hei sanam ki ankhon mei
खूबसूरत गीत !
बहुत ही सुंदर पंक्तियाँ
आपकी पोस्ट चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
कृपया पधारें
http://charchamanch.blogspot.com
चर्चा मंच-805:चर्चाकार-दिलबाग विर्क>
कातिबे तकदीर को मंजूर पाया, (कातिब-ऐ-तकदीर=विधाता)
तस्सवुर में तेरा हसीं नूर पाया।
shbdon ke arth samjhaaye ehsaan kiyaa .khoobsoorati aur badhi prem geet kee .
shbdon ke arth samjhaaye ehsaan kiyaa .khoobsoorati aur badhi prem geet kee .
nice one
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