...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
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मार
कजरारी जुल्फ़ों और गलमुच्छों का रंग कब धवल हुआ 'परचेत', कुछ पता ही न चला, बस, साज़ और सामान जुटाने मे ही मसरूफ़ रह गया, वक्त कब हा...
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ये दिल निसार करके जाना कि राहे जफा होते है लोग, सच में, हमें मालूम न था कि यूं भी बावफा होते है लोग ! सोचते थे कि नेमत है खुदा की य...
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नोट: फिलहाल टिप्पणी सुविधा मौजूद है! मुझे किसी धर्म विशेष पर उंगली उठाने का शौक तो नहीं था, मगर क्या करे, इन्होने उकसा दिया और मजबूर कर द...

ला-जवाब" जबर्दस्त!!
ReplyDeleteवैलेंटाईन डे की हार्दिक शुभकामनायें !
ReplyDeleteये तोहफा वाकई बहुत मूल्यवान है :):)
ReplyDeleteसच कितनी मेहनत करके लाया है कीमती तोहफ़ा …………प्रेमी हो तो ऐसा………………प्रेम दिवस की शुभकामनाएँ!
ReplyDeleteप्रेम का समर्पण देखिये।
ReplyDeleteयह झपटमार तो ईमानदार निकला जो सच्च बोल गया.
ReplyDeleteये ताऊ तो कुछ ज्यादा ही सच्चा निकला.:)
ReplyDeleteरामराम.
समर्पण हो तो ऐसा ।
ReplyDeleteबहुत गहरा प्रेम ...प्रेम दिवस की शुभकामनायें
ReplyDeleteये पहलू का तो हमें पता ही नहीं था :)
ReplyDeletekhoobsoorat tohfa..
ReplyDeleteपुलिसिए भी अपने डंडे को तेल पिला कर तैयार हैं। जनता हवलदार ने नयी नकोर चालान बुक निकाल ली है। कहीं हत्थे मत चढ जाना, बिना चालान के ही अंदर का रास्ता दिखा देगा। उसे पिछला वेलेन्टाईन याद है,
ReplyDeleteबहुत खूब गोदियाल साहब ! शुभकामनायें !
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