...............नमस्कार, जय हिंद !.......
मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून
गजल एवं समसामयिक लेख !
ख्वाइश !
Get link
Facebook
X
Pinterest
Email
Other Apps
-
मैंने कब ये चाहा कि मैं भी बहुत बड़ा 'रिच' होता, मेरी तो बस, इतनी सी ख्वाइश थी ऐ जिन्दगी, कि तुझमे भी एक ऑन-ऑफ का स्विच होता, जिसे मैं मन माफिक जब 'जी' में आता, जलाता और बुझाता।
ये दिल निसार करके जाना कि राहे जफा होते है लोग, सच में, हमें मालूम न था कि यूं भी बावफा होते है लोग ! सोचते थे कि नेमत है खुदा की ये जज्बा , इल्म न था कि वफ़ा की कस्मे खाने वाले, इस कदर बेवफा होते है लोग ! दिल और आँख का ऐसा आपसी देखा जो समन्वय 'परचेत', नजर देखे, दिल शकूं पाए, मनीषी ऐसे ही नफ़ा होते है लोग !
तमाम जंगल के बीहड़ों में जो कुछ घटित हो रहा हो, उससे क्या उस जंगल का राजा अंविज्ञ रह सकता है? या फिर यूं कहा जाए कि यदि उसे उसके राज्य में अन्याय होता दिखाई न दे, तो फिर क्या ऐसे नजरों से लाचार प्रतिनिधि को राजा बने रहने का कोई हक़ है? यदि उसे हमेशा किसी तीसरे ने ही आकर जगाना है, तो पूरे जंगलात के लिये यह निश्चिततौर पर एक बड़ी चिंता का विषय है। और इससे भी महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि क्या उसे जगाने वाला भी वाकई ईमानदार प्रयास कर रहा है, या सिर्फ खानापूर्ति, ताकि सिर्फ सुहानुभूति बटोरने के लिए जंगल की तमाम वादी की आँखों मे धूल झोंक सके ? और ठीक इसी सन्दर्भ में श्रीमती सोनिया गांधी के उस पत्र को भी रखा जा सकता है, जो उन्होंने कल इस देश के प्रधानमन्त्री श्री मनमोहन सिंह को लिखा और जिसमे उनसे यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि आईएएस अधिकारी सुश्री दुर्गा शक्ति के साथ कोई अन्याय न हो। उत्तर प्रदेश में बैठे...
पिछले कुछ दिनों से ब्लॉग जगत पर एक ख़ास बात के ऊपर नजर गडाए था ! देखना चाहता था कि अक्सर किसी एक ख़ास मुद्दे पर एक साथ लेखों की बाढ़ निकाल देने वाले हमारे ब्लॉगर बंधू-बांधव इस मामले पर कितने संजीदा है ! लेकिन यह जानकर निराशा हाथ लगी कि किसी ने भी इस और ध्यान देकर लिखना तो दूर, कहीं पर टिपण्णी करना भी मुनासिब नहीं समझा( हाँ अगर कुछ मेरी नजरो से ही छूट गया हो तो क्षमा चाहूंगा ) ! इस ब्लॉग जगत पर मैं अक्सर देखता हूँ कि महिलाओं से सम्बंधित बातो पर कुछ लोग नाहक ही दुबले हुए जाते है! साथ ही कुछ महिला ब्लोगर किसी ब्लोगर की सार्थक पहल को भी महज एक ढकोस्लाबाजी कहकर कई बार अप्रिय शब्दावली इस्तेमाल करती है! अभी हाल का एक उदहारण मैं इस तरह से देता हूँ कि इस ब्लॉग जगत के हमारे एक वरिष्ठ और सम्मानित ब्लॉगर श्री सी.एम् प्रसाद जी ने एक लेख लिखा था, 'महिला सुशिक्षित और सशक्त हो', उस लेख की कड़ी में एक महिला ब्लोगर की टिपण्णी निराशाजनक लगी ! मैं उस टिप्पणी की चर्चा यहाँ नहीं कर रहा, मगर इस लेख के माध्यम से एक छोटा सा संदेस उन लोगो तक पहुंचाना चाहता हूँ कि आपको यह समझना भी जरूरी है कि सिर्फ '...
चाह नहीं रिच हो जाऊं
ReplyDeleteऔर सुरबाला को कार में बिठाऊं :)
वाह!!!वाह!!! क्या कहने, बेहद उम्दा
ReplyDeleteजब जी में आता,
ReplyDeleteजलाता बुझाता !
कुछ तो अपने
मन माफिक कर पाता !!
गजब कि पंक्तियाँ हैं ...
बहुत सुंदर रचना.... अंतिम पंक्तियों ने मन मोह लिया...
कभी कभी हम सभी को एक स्विच की आवश्यकता महसूस होती है....
ReplyDeleteकभी कभी हम सभी को एक स्विच की आवश्यकता महसूस होती है....
ReplyDeleteयह स्विच मिल जाये तो हमें भी बता दीजियेगा।
ReplyDeleteवाह ,स्विच टू लिव ...
ReplyDeleteकाश ऐसा संभव होता, मज़ा ही आ जाता..............
ReplyDeleteवाह वाह बेहतरीन पोस्ट !
बहुत सुंदर अभिव्यक्ति....
ReplyDeleteसाँई इतना दीजिए जा में कुटुम्ब समाय!
ReplyDeleteजब जी में आता,
ReplyDeleteजलाता बुझाता !
कुछ तो अपने
मन माफिक कर पाता !!
काश ऐसा हो पाता.:)
रामराम.
ऊपरवाला स्विच ओवर का ऑप्शन नहींदेता गोदियाल जी...वैसे आपकी ख्वाहिश पूरा हो एही हमरा कामना है!!
ReplyDeleteबहुत खूब । ऑन ऑफ़ का आइडिया बढ़िया है ।
ReplyDeleteबहुत ही शानदार! फोटो भी गज़ब का है......
ReplyDeleteव्यंग्य: युवराज और विपक्ष का नाटक
ऐसा स्विच तो सभी ढूंढ रहे हैं......
ReplyDeleteगोदियाल जी, मिल जाये तो हमें भी बताना।
ReplyDeleteऐ जिन्दगी,
ReplyDeleteकि काश !
तुझमे भी एक
ऑन-ऑफ का स्विच होता,
जब जी में आता,
जलाता बुझाता !
कुछ तो अपने
मन माफिक कर पाता !
--साथ में एक रिवर्स फारवर्ड का गियर. :)
बस अब इसी की कसर है ...स्विच ऑन ऑफ का भी आविष्कार हो ही जायेगा
ReplyDeletesir ji, switch to aaj bhi hai, lekin kambaqt bijli aaye to sahi.
ReplyDeletegood shot