न हमारा ईमान बचा, न ही पहचान बची,
बतलाएं भी तो बतलाएं, तुम्हें क्या सची,
उम्मीदों और यादों के सहारे, ऐ 'परचेत',
थोड़ी सी ख्वाहिशों की बस, जां बची।
...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
हमने तो मरने को नहीं कहा था, अरे वो, हमें पत्थर दिल कहने वालों, जो पास है तुम्हारे उसी पे जी लेते, मुफलिसी , तंगदिली मे जीने वालों । बस, मे...
सुंदर
ReplyDeleteNice Post.
ReplyDeletehanuman chalisa
Free AI Visibility Checker
ReplyDelete