प्रणय गीत- तुम मिले !
कातिब-ऐ-तकदीर को मंजूर पाया, तस्सवुर में तुम्हारा हसीं नूर पाया। (कातिब-ऐ-तकदीर=विधाता) (तस्सवुर में = ख्यालों में ) बिन पिए ही मदमस्त हो गए हम, तरन्नुम में तुम्हारे वो सुरूर पाया। (तरन्नुम= गीत ) कुछ बात है हममे, जो हमें तुम मिले, मन में पलता इक ऐंसा गुरुर पाया। सेहर हसीं और शामे रंगीं हो गई, तुमसा जब इक अपना हुजूर पाया। (सेहर = सुबह ) जब निहारने नयन तुम्हारे हम गए, उन्हें प्यार के खुमार में ही चूर पाया । बेकस यूँ लगा, खो गई महक फूल की, तुमको जब कभी अपने से दूर पाया। (बेकस = अकेला )