Tuesday, January 20, 2026

दानदाता च महीपति;



कडकछाप मुद्रीकृत सारे ब्लौगर-सलौगर, 

यू-ट्यूब पे कमाई की धौंस वाले यूट्यूबर,

आज सबके सब मैंने पशेमान कर दिए,

दस सेंट एडसेंस से मैंने भी कमाए थे,

सारे के सारे गुगल को ही दान कर दिए।🤣


Saturday, January 17, 2026

बहुरूपिये!

अब कहूं भी कैंसे कि तू हिसाब-ए-मुहब्बत, 

किस तरह मुझसे गिन-गिन के लेती थी,

रहती तो हमेशा नज़रों के सामने थी, मगर

जमाने के आगे कुछ कम ही दिखाई देती थी।

दिले नादान



याद तो होगा तुमको 

वो दौर-ए-जवानी,

इक दोराहे पर अचानक 

हम-तुम मिले थे,

जहां सड़क तो 

खाली-खाली थी मगर,

सड़क किनारे कुछ 

चाहत के फूल खिले थे।

शनै:-शनै: जब हमने 

कदम बढ़ाए उसतरफ, 

इधर, इसतरफ 

एक वीरान सा सहरा था, 

उधर एक अशांत  मन 

जमीं पे ठहरा था,

अंततः न तो छांव ही मिल पाई, 

न पानी ही,

ज़ख्म जो तुमने दिया था, 

बहुत गहरा था।


Friday, January 16, 2026

अफसोस।

 दिन-रात हो कि सुबह-शाम बस,

यही अफसोस कचोटता है हाए,

ऐ जिंदगी तुझे हम तमाम उम्र,

बड़े सलीके से नहीं रख पाए।

समझ !

देहिक अपच हो तो खुशी 

एक कब्ज़हर चूर्ण जैसा होता है,

यूं तो समय प्रतूर्ण है मगर,

 हर पल महत्वपूर्ण जैसा होता है।



Tuesday, January 13, 2026

छंद

पर्व लोहड़ी का था

और हम आग देखते रहे,

उद्यान राष्ट्रीय था और

हम बाघ देखते रहे।

ताक में बैठे शिकारी

हिरन-बाज देखते रहे,

हुई बात फसल कटाई की,

हम अनाज देखते रहे।

समझ, नासमझ !

मिले न 'फूल' तो हमने 

'चतुरों' से दोस्ती कर ली,

मजबूरी का नाम गांधी, 

जिंदगी यूं ही बसर कर ली।





Sunday, January 11, 2026

द्वंद्व

उलझकर मेरी बातें कुछ यूं,  

तुम्हारी बातों में रह गई,

दिल की जो भी ख्वाहिशें थी, 

जज्बातों में बह गई।

जिया उलझाने की तुम्हारी 

ये हरकतें बड़ी नासाज़ लगी,

श्रुतिपुट जो सुनना न चाहते थे 

वो तुम्हारी नज़रें कह गई।



Saturday, January 10, 2026

असर

शाम-ओ-सहर,

हमारे मिलने पर,

बीवियों की डपट का

जो रंग  लग गया,

अब क्या बताऊं, 

तुम्हें ऐ दोस्त!

कांच के गिलासों पे भी

जंग लग गया।

Friday, January 9, 2026

खुदानाखास्ता

गैर समझा करते थे जिन्हें हम,

दिल ने उन्हें कुछ इसतरह अपनाया,

दूर भाग खड़ी हुई तन्हाई हमसे,

हम अकेले को जब मिला हमसाया ।


फिर वो हमसाया कुछ यूं हमें भाया,

तमाम जिंदगी की पलट गई काया,

जिन परछाइयों से डरते थे कभी हम,

आखिर,उन्हीं परछाइयों ने हमें अपनाया।

 

Tuesday, January 6, 2026

मुफ्तखोरी

जब भी, जो भी जुबां पे आता है तुम्हारी, बक देते हो, 

मुफ्त में जिसका भी लिखा हुआ मिल जाए पढ़ देते हो, 

फुर्सत मिले तुम्हें तो सोचना, एक कमेंट के भूखें को

क्या, सही में कभी आप उसको उसका हक देते हो?



Thursday, January 1, 2026

आगाज़ - 2026 !


वर्ण आखिरी, वैश्य, क्षत्रिय, विप्र सभी,

सनातनी नववर्ष का जश्न मनाया कभी ?

नहीं, स्व-नवबर्ष के प्रति जब व्यवहार ऐसा,

फिर  पश्चिमी  नवबर्ष  पर तकरार कैसा?


समझ पाओ तो समझ लेना क्षुब्ध भावनाएं,

आपको  नूतनवर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं। 🎂 🙏


दानदाता च महीपति;

कडकछाप मुद्रीकृत सारे ब्लौगर-सलौगर,  यू-ट्यूब पे कमाई की धौंस वाले यूट्यूबर, आज सबके सब मैंने पशेमान कर दिए, दस सेंट एडसेंस से मैंने भी कमाए...