Saturday, January 31, 2026

अधूरी हसरत

दिलों की हसरत, मिलन की चाहत, न तो इबादत ही रंग लाई 

और न  ही दिल की दुआ ,

हो जाता मिलन अचानक हमारा भी किसी मोड़ पर 'परचेत,' 

कभी ऐसा इत्तेफाक न हुआ।

Friday, January 30, 2026

दौर-ए-बदलाव

सांझ ढले, मेरे साथ बैठकर 

एक पैग व्हिस्की,

कभी वो संग-सग पीती थी,

जब न तो आभासी दुनिया थी,

और ना ही वो इस कदर ,

अलग ही दुनियां में रहकर जीती थी।

अब उसने व्हिस्की पीना छोड़ दिया है,

आजकल दिन-रात सेल-फोन पीती है।।

Thursday, January 29, 2026

हौंसला

हौसलों के दमपर अभी तक, 

जी है जिंदगी हमने,

डटकर किया है मुकाबला, 

राह की दुश्वारियों का,

हर शै से निकले हैं हम, 

उबरकर भी, उभरकर भी,

जरा भी न कभी बेबस हुए, 

बोझ ढोते लाचारियों का।

Wednesday, January 28, 2026

सवाल

वो लम्हा तुम जरा बताओ,

जब मैं तुम्हारे संग नहीं था,

कौन सा था वो लम्हा-लम्हा

जिसमें, प्यार का रंग नहीं था?


यकीनन

तुम जानते हो कि मेरे होते, 

सलामत है लाज तुम्हारी,

इसीलिए आज तक मैं,

तुम्हारे राज तक नहीं गया ।

मांगने की आदत जिंदगी में 

मुझसे कभी पाली न गई,

मोहब्बत में इसीलिए मैं भरोंसे के 

अल्फ़ाज़ तक नहीं गया ।

Tuesday, January 27, 2026

टीस

साफ-गोई की सजा यह मिली हमको 

कि हम झूठे बन गये,

यही वजह थी कि जहां के आगे ऐ जिंदगी, 

हम अनूठे बन गये।

संतुष्टि


यूं तो इस मेरे किरदार को, 

अंधेरों से हमेशा शिकायत ही रही,

किंतु चलता चला गया, 

नुक़्स भी मिले, दिशा भी मिली।

Monday, January 26, 2026

फलसफा जिंदगी











वो अब आ नहीं सकता फिर से, 

गुज़र गया जो वक्त अपनी राहों से,

किन्तु, मुश्किल तो होगा जिंदगी तेरा 

सुगमता से निकलना, मेरी पनाहों से।

घड़ी की तरह खिसकती जा रही हो, 

पकड़कर रखूंगा तुझे अपनी बांहों से,

सुगम-दुर्गम, हर दौर जिया है तेरे संग,

मुझे फर्क नहीं पड़ता,साहों-सलाहों से।

Sunday, January 25, 2026

राय

वर्तमान  तुम अपना व्यर्थ ही न गंवाना,

उलझकर बातों में किसी भविष्यवेता के,

बहकावे में कभी भी हरगिज़ मत आना,

सड़कछाप, किसी दो कौड़ी के नेता के।

Saturday, January 24, 2026

पल-पल



क्या बताऊं कि ये 

चोंतीस साल कैसे बीते,

किस मुश्किल में 

हर लम्हा गुजरा जीते-जीते,

याद तो होगा तुम्हें कि मैंने 

तुमको भी न्योता दिया था,

जवानी के फोल्डर जब मैंने, 

'बीवी' ऐप डाउनलोड किया था!!

Friday, January 23, 2026

सवाल!

हूं मैं तुम्हारा यार ऐसा ,

कविता का सार जैसा,

प्रेम से गर प्यार ना निभे,

फिर प्यार का इजहार कैसा?



Wednesday, January 21, 2026

एहसास !

थप्पड खाकर वो 'डिस' उनकी

यूं, थोड़ी हमने भी चख दी थी,

बस, ग़लती यही रही हमारी कि

दुखती रग पर उंगली रख दी थी।



Tuesday, January 20, 2026

दानदाता च महीपति;



कडकछाप मुद्रीकृत सारे ब्लौगर-सलौगर, 

यू-ट्यूब पे कमाई की धौंस वाले यूट्यूबर,

आज सबके सब मैंने पशेमान कर दिए,

दस सेंट एडसेंस से मैंने भी कमाए थे,

सारे के सारे गुगल को ही दान कर दिए।🤣


Saturday, January 17, 2026

बहुरूपिये!

अब कहूं भी कैंसे कि तू हिसाब-ए-मुहब्बत, 

किस तरह मुझसे गिन-गिन के लेती थी,

रहती तो हमेशा नज़रों के सामने थी, मगर

जमाने के आगे कुछ कम ही दिखाई देती थी।

दिले नादान



याद तो होगा तुमको 

वो दौर-ए-जवानी,

इक दोराहे पर अचानक 

हम-तुम मिले थे,

जहां सड़क तो 

खाली-खाली थी मगर,

सड़क किनारे कुछ 

चाहत के फूल खिले थे।

शनै:-शनै: जब हमने 

कदम बढ़ाए उसतरफ, 

इधर, इसतरफ 

एक वीरान सा सहरा था, 

उधर एक अशांत  मन 

जमीं पे ठहरा था,

अंततः न तो छांव ही मिल पाई, 

न पानी ही,

ज़ख्म जो तुमने दिया था, 

बहुत गहरा था।


Friday, January 16, 2026

अफसोस।

 दिन-रात हो कि सुबह-शाम बस,

यही अफसोस कचोटता है हाए,

ऐ जिंदगी तुझे हम तमाम उम्र,

बड़े सलीके से नहीं रख पाए।

समझ !

देहिक अपच हो तो खुशी 

एक कब्ज़हर चूर्ण जैसा होता है,

यूं तो समय प्रतूर्ण है मगर,

 हर पल महत्वपूर्ण जैसा होता है।



Tuesday, January 13, 2026

छंद

पर्व लोहड़ी का था

और हम आग देखते रहे,

उद्यान राष्ट्रीय था और

हम बाघ देखते रहे।

ताक में बैठे शिकारी

हिरन-बाज देखते रहे,

हुई बात फसल कटाई की,

हम अनाज देखते रहे।

समझ, नासमझ !

मिले न 'फूल' तो हमने 

'चतुरों' से दोस्ती कर ली,

मजबूरी का नाम गांधी, 

जिंदगी यूं ही बसर कर ली।





Sunday, January 11, 2026

द्वंद्व

उलझकर मेरी बातें कुछ यूं,  

तुम्हारी बातों में रह गई,

दिल की जो भी ख्वाहिशें थी, 

जज्बातों में बह गई।

जिया उलझाने की तुम्हारी 

ये हरकतें बड़ी नासाज़ लगी,

श्रुतिपुट जो सुनना न चाहते थे 

वो तुम्हारी नज़रें कह गई।



Saturday, January 10, 2026

असर

शाम-ओ-सहर,

हमारे मिलने पर,

बीवियों की डपट का

जो रंग  लग गया,

अब क्या बताऊं, 

तुम्हें ऐ दोस्त!

कांच के गिलासों पे भी

जंग लग गया।

Friday, January 9, 2026

खुदानाखास्ता

गैर समझा करते थे जिन्हें हम,

दिल ने उन्हें कुछ इसतरह अपनाया,

दूर भाग खड़ी हुई तन्हाई हमसे,

हम अकेले को जब मिला हमसाया ।


फिर वो हमसाया कुछ यूं हमें भाया,

तमाम जिंदगी की पलट गई काया,

जिन परछाइयों से डरते थे कभी हम,

आखिर,उन्हीं परछाइयों ने हमें अपनाया।

 

Tuesday, January 6, 2026

मुफ्तखोरी

जब भी, जो भी जुबां पे आता है तुम्हारी, बक देते हो, 

मुफ्त में जिसका भी लिखा हुआ मिल जाए पढ़ देते हो, 

फुर्सत मिले तुम्हें तो सोचना, एक कमेंट के भूखें को

क्या, सही में कभी आप उसको उसका हक देते हो?



Thursday, January 1, 2026

आगाज़ - 2026 !


वर्ण आखिरी, वैश्य, क्षत्रिय, विप्र सभी,

सनातनी नववर्ष का जश्न मनाया कभी ?

नहीं, स्व-नवबर्ष के प्रति जब व्यवहार ऐसा,

फिर  पश्चिमी  नवबर्ष  पर तकरार कैसा?


समझ पाओ तो समझ लेना क्षुब्ध भावनाएं,

आपको  नूतनवर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं। 🎂 🙏


दुविधा

इश्क़ कोई पोंछा नहीं है, सिखा गई आज काम वाली बाई, किधर जाऊं समझ नहीं आता, आगे कुआं है और पीछे खाई।