यूं भी बावफा होते है लोग !
ये दिल निसार करके जाना कि राहे जफा होते है लोग, सच में, हमें मालूम न था कि यूं भी बावफा होते है लोग ! सोचते थे कि नेमत है खुदा की ये जज्बा , इल्म न था कि वफ़ा की कस्मे खाने वाले, इस कदर बेवफा होते है लोग ! दिल और आँख का ऐसा आपसी देखा जो समन्वय 'परचेत', नजर देखे, दिल शकूं पाए, मनीषी ऐसे ही नफ़ा होते है लोग !

यही दर तो साथ देने पर मजबूर करता है ॥सब एक ही थैले के चट्टे बट्टे हैं ।
ReplyDeleteमैं तुझे डराऊं, तू मुझे डराये
ReplyDeleteजिसकी बारी आये, दांव दे जाये
ईमानदार राजनेता हैं हम तो ताऊ
कभी अपनों को दगा नही देते भाऊ
रामराम
छापा करुना पर पड़ा, ममता थी निर्दोष ।
ReplyDeleteमहाठगिन माया ठगी, हृदय मुलायम तोष ।
हृदय मुलायम तोष, बड़ा मोहन मन सच्चा ।
छोड़ हमें जो जाय, उड़ा देते परखच्चा ।
सी बी आय संकेत, खो रही सत्ता आपा ।
टला बहुत स्टालिन, आज पड़ जाता छापा ॥
लोग पहले से समझते ही नहीं हैं..
ReplyDeleteबढ़िया है ,महोदय....
ReplyDeleteसाभार...
साथ तो छोड़ना ही नही चाहिए
ReplyDeleteये तो होना ही था ...
ReplyDeleteसी बी आई मेरी जेब में जो रहती है ...