असर

शाम-ओ-सहर,

हमारे मिलने पर,

बीवियों की डपट का

जो रंग  लग गया,

अब क्या बताऊं, 

तुम्हें ऐ दोस्त!

कांच के गिलासों पे भी

जंग लग गया।

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