शाम-ओ-सहर,
हमारे मिलने पर,
बीवियों की डपट का
जो रंग लग गया,
अब क्या बताऊं,
तुम्हें ऐ दोस्त!
कांच के गिलासों पे भी
जंग लग गया।
...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
दिलों की हसरत, मिलन की चाहत, न तो इबादत ही रंग लाई और न ही दिल की दुआ , हो जाता मिलन अचानक हमारा भी किसी मोड़ पर 'परचेत,' कभी ऐसा...
सुंदर
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