Saturday, January 10, 2026

असर

शाम-ओ-सहर,

हमारे मिलने पर,

बीवियों की डपट का

जो रंग  लग गया,

अब क्या बताऊं, 

तुम्हें ऐ दोस्त!

कांच के गिलासों पे भी

जंग लग गया।

2 comments:

शुन्य

उसका स्वरूप  हरदम सराहता हूं, जिस रोशनी को  दिल से चाहता हूं, आश लगाए रहता हूं  कि रोशनी कभी तो  मेरे घर आएगी,  अतिशय प्रेममय होकर आलिंगनबद्...