...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
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आगाज़ - 2026 !
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बिल्कुल सही कहा आपने.
ReplyDeleteरामराम.
कलिकाल बिहाल किए मनुजा, ना जानत है अनुजा तनुजा
ReplyDeleteलालच निचोड़ दिए मानव ममता, तब क्या बचत है भाईजा
"बाजारवाद की इस अंधी दौड़ में, न जाने हर कोई क्यों इस कदर उतावला हो गया है।। "
ReplyDeletebilkul sahi baat!
आज हर चीज़ के मायने निकालने बहुत ज़रूरी हैं :-(
ReplyDeleteहर चीज में मतलब जो देखने लगा है इंसान!
ReplyDeleteबढ़िया प्रस्तुति है आदरणीय-
ReplyDeleteआभार आपका-
बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
ReplyDeleteआपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार (06-07-2013) को <a href="http://charchamanch.blogspot.in/ चर्चा मंच <a href=" पर भी होगी!
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'
बहुत गहरी बात कही है।
ReplyDeleteदौड़ रहे सब, आगे निकलें,
ReplyDeleteअपने घर से भागें, दिख ले।