...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
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O sitting moon !
O setting moon! Come back soon. For me, you are not a dark midnight, for me, to be honest, you are a happy noon. O setting moon! Come back ...
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ये दिल निसार करके जाना कि राहे जफा होते है लोग, सच में, हमें मालूम न था कि यूं भी बावफा होते है लोग ! सोचते थे कि नेमत है खुदा की य...
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तमाम जंगल के बीहड़ों में जो कुछ घटित हो रहा हो, उससे क्या उस जंगल का राजा अंविज्ञ रह सकता है? या फिर यूं कहा जाए कि यदि उसे उसके राज्य मे...
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नोट: फिलहाल टिप्पणी सुविधा मौजूद है! मुझे किसी धर्म विशेष पर उंगली उठाने का शौक तो नहीं था, मगर क्या करे, इन्होने उकसा दिया और मजबूर कर द...
बिल्कुल सही कहा आपने.
ReplyDeleteरामराम.
कलिकाल बिहाल किए मनुजा, ना जानत है अनुजा तनुजा
ReplyDeleteलालच निचोड़ दिए मानव ममता, तब क्या बचत है भाईजा
"बाजारवाद की इस अंधी दौड़ में, न जाने हर कोई क्यों इस कदर उतावला हो गया है।। "
ReplyDeletebilkul sahi baat!
आज हर चीज़ के मायने निकालने बहुत ज़रूरी हैं :-(
ReplyDeleteहर चीज में मतलब जो देखने लगा है इंसान!
ReplyDeleteबढ़िया प्रस्तुति है आदरणीय-
ReplyDeleteआभार आपका-
बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
ReplyDeleteआपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार (06-07-2013) को <a href="http://charchamanch.blogspot.in/ चर्चा मंच <a href=" पर भी होगी!
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'
बहुत गहरी बात कही है।
ReplyDeleteदौड़ रहे सब, आगे निकलें,
ReplyDeleteअपने घर से भागें, दिख ले।