Tuesday, January 27, 2026

संतुष्टि


यूं तो इस मेरे किरदार को, 

अंधेरों से हमेशा शिकायत ही रही,

किंतु चलता चला गया, 

नुक़्स भी मिले, दिशा भी मिली।

3 comments:

सलाह!

मत दिया कर दोष तू हमको  दरारों में झांकने का , ऐ दोस्त! तेरी नादानियों का खामियाजा, भला ये, तमाम जमाना क्यों भुगते?