Monday, December 14, 2009

शर्मशार है लोकतंत्र !


रोज की भांति सुबह तड़के जागा और बाहर बरामदे में खडा हाथ पैर हिला-डुला रहा था कि सामने पार्क के कोने पर एक इंसानी आकृति सी दिखी! गौर से देखा तो वह अपने मोहल्ले में झाडू-पोचा करने वाली अहिल्या थी ! पार्क के कोनो में पड़े कागजो को समेट रही थी! जिस रास्ते पर सुबह अपने पालतू कुत्ते को लेकर टहलने के लिए जाता हूँ, वहीं एकदम सड़क के किनारे ही अहिल्या बाई झुग्गी डाल रहती है ! मैं जब पास से गुजरा तो वह कुछ कागज़ चूल्हे में डाल आग जलाने की कोशिश कर रही थी! मुझे देख नमस्कार बाबू जी बोली ! मैंने भी नमस्कार कहा और पूछा, ज्यादा ठण्ड हो गई है, आज सुबह-सुबह कागज समेट कर ले जा रही थी ! वह बोली , बाबूजी क्या करे, चुल्हा जलाने के लिए लकडिया ही नहीं है, और महंगाई इतनी हो गई ! फिर वह देश की एक ख़ास नेता को भद्दी गाली देने लगी ! मैंने कहा,क्या करे, इन्हें जिताते भी तो तुम्ही लोग हो ! वह बोली, नहीं बाबूजी हम तो इन्हें कभी वोट देते ही नही , क्योंकि ये जब भी आते है महंगाई बढ़ती है !

मैं आगे बढ़ा और सोचने लगा कि जब इस देश का निम्न वर्ग कहता है कि ये तो इन्हें कभी वोट देते ही नहीं, मध्यम वर्ग कहता है कि हम लोग तो पढ़े लिखे है इसलिए ऐरे-गैरे को हम वोट डालते ही नहीं! और उच्च वर्ग तो शायद ही वोट डालने निकलता हो, तो फिर वह हरामी है कौन? जो इन चोर उचक्कों को जिता कर पिछले ५०-६० सालो से इस देश का बेड़ा गरक करने पर तुला है? हिंद वासियों, उसे पहचानो और मारो उस काली भेड़ को ! अरे मोटी बुद्धि वालो, ये डंडा पकड़ कर कहा जा रहे हो ? मारने से मेरा आशय डंडे से मारना नहीं, उसको उसी शैली में मारो जिस शैली में वह अपनी गंदी तरकीबे अपनाकर पिछले बासठ साल से इस देश के हर गरीब को तिल-तिल मरने पर मजबूर कर रहे है! जागो हिंद वासियों, जागो !!
बासठ साल की आजादी के बाद, आज यह लोकतंत्र शर्मिन्दा है !
जागो हिन्दवासियों ! मानवता का खूनी दुश्मन अभी ज़िंदा है !!


खबर दैनिक हिंदुस्तान के सौजन्य से !

Labels:

16 Comments:

Blogger श्यामल सुमन said...

हालात तो शर्मसार करने लायक है ही गोदियाल साहब। आपकी चिन्ता भी जायज है।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com

Monday, 14 December, 2009  
Blogger Mithilesh dubey said...

बिल्कुल सही कहा आपने , आपकी चिन्ता जायज है । और जो एक बात समझ नहीं आती गोदियाल जी कि जब आंतकी हमले देश पर होते है तो नेता जल्दि नहीं मरता , जरा इसके पिछे का कारण बताने की कृपा करियेगा कि ऐसा होता क्यों है ।

Monday, 14 December, 2009  
Blogger अजय कुमार said...

जब बुरे उम्मीदवारों में कम बुरे को वोट देने का आप्शन हो तो यही होगा , इन्हें चुनाव लड़ने से रोकने का उपाय करना होगा

Monday, 14 December, 2009  
Blogger संगीता पुरी said...

अभी अभी कूडे बीननेवाली मात्र पांच से सात वर्ष की दो बच्चियों को कुत्‍तों के द्वारा दौडाए जाने पर भयानक चीत्‍कार करते हुए भागते देखा .. इसके कारण परेशान दिमागी हालत को ठीक करने कंप्‍यूटर पर बैठी तो आपने महंगाई से त्रस्‍त इस अहिल्‍या बाई की कहानी सुना दी .. यही सब हो रहा है भारतवर्ष में .. सरकार और वैज्ञानिकों का पक्ष लेनेवालों को विकास दिख रहा है !!

Monday, 14 December, 2009  
Blogger पी.सी.गोदियाल "परचेत" said...

मिथिलेश जी पिछले आम चुनाव के बाद मैंने इस विषय पर एक लेख लिखा था , " कुछ बाते जो अनोखी लगी इस चुनाव में " आप मेरे इस लेख को इस लिंक पर पढ़ सकते है ;

http://godiyalji.blogspot.com/2009/05/blog-post_13.html

Monday, 14 December, 2009  
Blogger संजय बेंगाणी said...

पहले तो यह बताओ सस्ता जहर मिल कहाँ गया जो रोटी की जगह आदमी ने खा लिया? भूखों मरने की नौबत आ गई है.

पता नहीं मशीन कहाँ से वोट उगलती है? :(

Monday, 14 December, 2009  
Blogger ghughutibasuti said...

धिक्कार है हमें व हमारे चुनाव को!
घुघूती बासूती

Monday, 14 December, 2009  
Blogger दिगम्बर नासवा said...

जायज़ है आकी चिंता और आपका आक्रोश .......... कम से कम ऐसा क़ानून तो होना ही चाहिए की कोई भी नेता २ बार से ज़्यादा चुनाव नही लड़ सकता ...... कम से कम कुछ फ्रेश ब्लड तो आए राजनीति में .........

Monday, 14 December, 2009  
Blogger डॉ. महफूज़ अली (Dr. Mahfooz Ali) said...

धिक्कार है हमें व हमारे चुनाव को!

Monday, 14 December, 2009  
Blogger Arshia Ali said...

काश, यह बात इस देश के ठेकेदारों तक भी पहुंचती।
------------------
ये तो बहुत ही आसान पहेली है?
धरती का हर बाशिंदा महफ़ूज़ रहे, खुशहाल रहे।

Monday, 14 December, 2009  
Blogger Murari Pareek said...

bahut zabardast baat kahi hai jaago voter jaago!! sabhi kahte hain inko hamne vote nahi diyaa kyaa pakistaan se mangaaye hain????

Monday, 14 December, 2009  
Blogger vandana gupta said...

godiyal ji

isi baat ka to rona hai.........har insaan aahat hai ........badlaav to aaj bhi aa sakta hai magar bhagat singh roj paida nhi hote.........kya fark hai halaton mein ..........kya isiliye aazadi payi thi ? aaj to garib aur garib ho gaya hai .....delhi jaise shahar mein zara puchiye to sahi wo 2 waqt ki roti ka jugaad kaise karta hai jabki achche achche insaanon ka in halaton mein jeena doobhar ho raha hai.

Monday, 14 December, 2009  
Blogger ताऊ रामपुरिया said...

आपका कहना सही है. हालात अफ़्सोसजनक हैं.

रामराम.

Monday, 14 December, 2009  
Blogger डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' said...

बासठ साल की आजादी के बाद,
आज यह लोकतंत्र शर्मिन्दा है !
जागो हिन्दवासियों ! मानवता का खूनी
दुश्मन अभी ज़िंदा है !!

गोदियाल जी!
इसकी नाभि में अमृत कुण्ड है!
इन्तजार कर रहे हैं कि
किसी राम का अवतार हो!

Monday, 14 December, 2009  
Blogger मनोज कुमार said...

चिन्ताजनक स्थिति। आपसे सहमत हूं।

Monday, 14 December, 2009  
Blogger Unknown said...

General and Poor story of Indians. Jitna ander jayegen utna hi shrmsar karne wali gareebi milegi. Government na hamare liye hai...na aapke liye. Hum sub bhagwan barose chal rahe hai....

Wednesday, 16 December, 2009  

Post a Comment

Subscribe to Post Comments [Atom]

<< Home