तुम जानते हो कि मेरे होते,
सलामत है लाज तुम्हारी,
इसीलिए आज तक मैं,
तुम्हारे राज तक नहीं गया ।
मांगने की आदत जिंदगी में
मुझसे कभी पाली न गई,
मोहब्बत में इसीलिए मैं भरोंसे के
अल्फ़ाज़ तक नहीं गया ।
...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
हो वर्चस्व की यदि अंंतहीन जंग, उसे मरते दम तक कभी न हारो, भद्र-प्रतिद्वंद्वी, बर्ताव हो निश्छल, हो शत्रु कपटी, उसे होश से मारो। मरुधर जो उ...
वाह
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