यकीनन

तुम जानते हो कि मेरे होते, 

सलामत है लाज तुम्हारी,

इसीलिए आज तक मैं,

तुम्हारे राज तक नहीं गया ।

मांगने की आदत जिंदगी में 

मुझसे कभी पाली न गई,

मोहब्बत में इसीलिए मैं भरोंसे के 

अल्फ़ाज़ तक नहीं गया ।

Comments

Post a Comment

Popular posts from this blog

यूं भी बावफा होते है लोग !

धार्मिक भावनाएं क्या हुई, कोई छुई-मुई हो गई !

'नारी' की चिंता में दुबले कुछ ब्लॉगर मित्र !