अब कहूं भी कैंसे कि तू हिसाब-ए-मुहब्बत,
किस तरह मुझसे गिन-गिन के लेती थी,
रहती तो हमेशा नज़रों के सामने थी, मगर
जमाने के आगे कुछ कम ही दिखाई देती थी।
...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
वो बिन वजह हंसना तेरा, वो बिन वजह रोना तेरा, जिंदगी और कुछ भी नहीं, तेरी -मेरी कहानी है। इक प्यार का नगमा.... #आशाभोंसलेविनम्रशर्द्दाजली!
रूपिए जुड़ा है न इसीलिए :)
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