Monday, April 13, 2026

बंदिशें ।


मायके ठहरने का वक्त बिटिया जानती है, ज्यादा न रुक पाएगी,

हेमंत ऋतु भी आई, कल शिशिर भी वसंत संग चली जाएगी।

Sunday, April 12, 2026

बताएं भी किसे?

 बेरुखी, खामोशी, यादों का बोझ,

फेहरिस्त लम्बी है इस  तन्हाई की,

अब क्या? उम्र कट गई 'परचेत' , 

राह तकते-तकते इक हरजाई की।

Saturday, April 11, 2026

पुरानी यादें।

भले ही वो हैंगओवर मेरे  लिए कुछ ही पल का था,

नशा मेरे प्यार का मगर, तीखा नहीं हल्का था,

क्या बताऊं किस कदर उस नशे मे मैं खो गया,

नशा जो पलभर के वास्ते तेरी आंखों से छलका था।

Friday, April 10, 2026

कुदरत













परिंदों ने घर बसाया, बच्चों संग फुर हुए,

निशानियां बसावट की मैं देख पाया था,

अपने छोटे से आशियां में उनके लिए,

जो मैंने भी इक छोटा सा नीड़ बनाया था।




Thursday, April 9, 2026

बंदिशें अपनी।


रातें अक्सर ही मुझसे सवाल किया करती हैं, 

और एक मैं हूं कि उनका जबाब ही नहीं देता,

कभी नयन थकते थे, अब कदम थकनें लगे हैं,

और कितना चल पाऊंगा, मैं हिसाब ही नहीं देता।


जज़्बात ऐसे लगने लगे हैं  मानो ये जज़्बाती नहीं,

जमाने की हसरतें और आदतें हैं जो जाती नहीं,

अधजगी नीदं मे जुबां लगे है कुछ पढने को आतुर,

और मैं हूं कि उसे पढ़ने को किताब ही नहीं देता।



अनियमित नींदचर्या, स्लीपिंग डिसआर्डर कह लो,

दर्द की कोई सीमा नहीं जितना सह सको, सह लो,

डगमगाते कदम कहते हैं कि बहक जाने दो हमें भी,

मगर 'परचेत' मौका-ए-बहकना ख्वाब ही नहीं देता।













Saturday, April 4, 2026

सलाह

तू खुद ही से इकबार रूबरू तो हो जा,

फिर जो कहना है, उसे आलेख लेना,

अरे वो, कश्ती के मुसाफिर, उतरने से पहले,

एकबार समन्दर तो जाकर देख लेना।

Saturday, March 21, 2026

अंदाज!

मेरी डांडी-कांठियों का मुलुक ज्यैल्यू,

Go there in the spring.

हैरा बण मा बुरांश का फूल

जब बण मा आग  लगाणा होला,

भीटा पाखों थैं फ्योलिं का फूल, 

पिन्ग्ला रंग मा रंग्याणा होला ..

लाइयां पैयां ग्वीराल फूलु ना,

The earth will be decorated,
Go there and sing.

Thursday, March 19, 2026

O sitting moon !


O setting moon!

Come back soon.

For me, you are

not a dark midnight,

for me, to be honest, you are a happy noon.

O setting moon!

Come back soon.

Monday, March 16, 2026

पुनर्विवरण !

रातों के हर पहर-दोपहर, 

जब भी  मैं करवट बदलूं,

बदली हुई हर करवट पर, 

कसम से आहें भरता हूं ,

उम्र पार कर चुका प्रेम की वरना,

 कह देता कि  मैं तुमपर मरता हूं ,

मत पूछो, ये नशा कौन सा करता हूं,

 सच में, मैं तुम्हें बतानें से डरता हूं।


Thursday, March 12, 2026

वज़ह!

गर तुम न खरीददार  होते,

यकीन मानिए, 

टके-दो-टके में भला कौन बिकता?

मुहब्बत बिकाऊ न है और न थी

कभी,

बस, निवेश गलत किया है तुमने,

इसीलिए घर में "धन" नहीं टिकता।



वाजिब बात

रूठ जाते हैं मुझसे मेरे अपने ही और 

मुझको मनाने मे जरा भी रुचि नहीं,

दिलचस्प हों भी अगर मुहब्बत की राहें,

क्या फायदा, जब दिल मे ही शुचि नहीं?

 

Wednesday, March 11, 2026

कश्मकश

सबब खामोशी, तेरा बहाना अच्छा है,

इश्क़ हुआ मगर इजहार न किया,

अंदाज़े मोहब्बत छुपाना अच्छा है,

शकुन बुरा ही सही, दिल जलाना अच्छा है।


Monday, March 9, 2026

हकीकत

उजागर न होने दिया हमने 

उजागर न करने के ऐब से,

वाकिफ बहुत खूब थे हम,

तुम्हारे छल और फरेब से।

सलाह

कह रहा हूं मैं तुमसे, 

ऐ बेस्वाद, बेसुरे भड़वे,

जुबां पे थोड़ी मीठास घोल,

मत बोल इतने भी बोल कडुए।


तू शिद्दत रख और  समर्पण कर,

मत पड़ फरेब में जिस्मानी शाम की,

रूहानी एहसास खुदा की इबादत ,

 लिखदे तू जाकर अपने नाम की।


Sunday, March 8, 2026

मन की हकीकत

न हमारा ईमान बचा, न ही पहचान बची,

बतलाएं भी तो बतलाएं, तुम्हें क्या सची,

उम्मीदों और यादों के सहारे, ऐ 'परचेत',

थोड़ी सी ख्वाहिशों की बस, जां बची।


Friday, March 6, 2026

तब्दीली

तेरी याद आना 

गुज़रे जमाने की बात हो गई,

पानी का गिलास 

सामने टेबिल पर पड़ा देखकर,

अब तो हिचकियों भी नहीं आती।

सफर अभी बाकी है।

अभी नहीं, सफ़र जब खत्म होने की दहलीज पर होगा, 

तभी सोचेंगे ऐ जिंदगी ! कि ज़ख्म कहां-कहां से मिले।


परिभाषा

कुछ दर्द ऐसे भी होते हैं

कि जो फटते नहीं,

फासले अगर बढ़ने लगें

तो फिर घटते नहीं।

Wednesday, March 4, 2026

हो ली,,,









पर्व रंगों का है वेरंगीन बन,

बैठा हूं बातें करता खुद से,

कभी न जाने क्यों ऐसा लगे,

हाथ धो बैठा हूं सुध-बुध से।

 

मदहोश-बेखबर, था तो नहीं,

दर्द का एहसास है बे-खुद से,

घाव जिस्म पे मेरे आहिस्ता कर,

अनुनय यही है बस, हुद-हुद से।



Friday, February 27, 2026

दरकार नहीं

मैं  अभी सो रहा हूं, मर्जी के हिसाब से, 

मर्जी के हिसाब से मुझे जागना है,

तुम मत रुको मेरे लिए, ऐ ज़िन्दगी,

भाग लो, जितनी तेजी से तुम्हें भागना है।

Wednesday, February 25, 2026

लुभावना

सफर मे धूप तो बहुत होगी,

सूरज को ढक सको तो चलो, 

एम्बूलैंस लेकर जा रही है रोगी, 

राह उसकी रोक सको तो चलो।

Friday, February 20, 2026

इल्तज़ा

 मोहब्बत मे, आंखों मे भर आए आंसुओं को

गिरने न देना 'परचेत',

क्योंकि प्यार के आंसू ही रूह की खुराक होते हैं।

Wednesday, February 18, 2026

वाजिब सवाल !

सवाल ये नहीं है कि जवानी में हम क्यों जीने मरने की कसमें खाते हैं,

सवाल ये है कि साठ के बाद ही क्यों 'परचेत',दर्द भरे गीत पसंद आते हैं।

Tuesday, February 10, 2026

वाहियात

आज उन्होंने जैसे मुझे, 

पानी पी-पीकर के कोसा,

इंसानियत से 'परचेत', 

अब उठ गया है भरोसा।


Monday, February 9, 2026

दुविधा

इश्क़ कोई पोंछा नहीं है,

सिखा गई आज काम वाली बाई,

किधर जाऊं समझ नहीं आता,

आगे कुआं है और पीछे खाई।


पैगाम

इस जिंदगी का फलसफा बस, इतना सा रहा 'परचेत', 

मुकाम पर हम खुद को लानत-मलामत हजार देते हैं,

संदेश उसतक पहूंचा देना, ऐ तख्त पर लटकाने वालों, 

चलो, कुछ यूं करते हैं अब जिंदगी, तुझको गुज़ार देते हैं।


Sunday, February 8, 2026

हकीकत

बेवफा क्या हुआ,

कतार में खड़े हैं कुशलक्षेम पूछने वाले,

जब बावफ़ा था 'परचेत' 

तो गली का कुत्ता भी  नहीं पूछता था।



Saturday, February 7, 2026

संस्कृत सीखिए

 अपने मुहल्ले में जरा सा सोबर दीखिए

ओर संस्कृत बोलना सीखिए,

खुद ही पूरी संस्कृत मत खाइए,

थोड़ा बीवी को भी सिखाइए।


जब झगड़े का मूड़ हो तो संस्कृत में ही लड़ना,

जमकर एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप मढ़ना,

झगड़ा कोई सुन रहा होगा, मन में न खल रहा होगा,

पड़ोसियों को लगे कि घर में हवन-पूजन चल रहा होगा।

Friday, February 6, 2026

ऐ जिंदगी!

अब और कहां तक  होगी इससे भी बदसूरत ज़्यादा,

जिंदगी, तू जिंदा कम नजर आती है, मूरत ज्यादा।



Thursday, February 5, 2026

पश्चाताप

अपने जो भी कहने को थे, सब अजनबी हुए,

और खामोशियां बन गई हमारी जीवन साथी,

क्या नहीं त्यागा था उनके लिए हमने 'परचेत',

हम-सफ़र तो थे किंतु, उनसे हम-नवाई ना थी।



ओ रे पिया, मैं तुम्हारी

अपना तन-मन लुटा के हारी,

ओ रे पिया, मैं तुम्हारी,

आगोश तुम्हारे, मेरा सुलभ लगे मन,

चाहे तन हो कितना ही भारी,

ओ रे पिया, मैं तुम्हारी।


संबंधों के तौर-तरीके मैं ना जानू,

और बनावटीपन मैं ना मानू,

या फिर कह लो दुनियादारी,

अब रह नहीं सकती मैं कुंवारी,

 ओ रे पिया, मैं तुम्हारी।


कोमल हूं पर कमजोर नहीं हूं,

सहमी-सहमी भोर नहीं  हूं,

हर पल साथ खड़े हो जब तुम,

कहके दिखाए कोई मुझे अबला नारी,

 ओ रे पिया, मैं तुम्हारी।




कोप

शरीक हुए थे जो कल के  कवि सम्मेलन में,

वो सब के सब, एक ही थाली के चट्टे-बट्टे थे,

एक से बढ़के एक पैदाइशी चमचे, तलवेचाट,

बस,यही कहूंगा कि सबके सब उल्लू के पठ्ठे थे।🤣


Wednesday, February 4, 2026

तहकिकात अभी जारी रहेगी

 


तहक़ीक़ात अभी जारी है

रिश्तों की खाइयों को पाटिये कि अब और न बढ़ें,

दिलों के सहरा में नजर आ रही दरार बहुत भारी है,

अगम्य राह, सत्य का पथ इतना दुर्गम कैसे हो गया,

बाधित क्यों है आवाजाही, तहक़ीक़ात अभी जारी है।‌


सदचित विभ्रम है और कानून  का कोई खौफ नहीं, 

राष्ट्र भयभीत किया जा रहा, बिखरने की तैयारी है, 

समृद्धि के पथ पर पता नहीं यह कौन सी दुश्वारी है, 

संयम पांवों तले क्यों आया, तहक़ीक़ात अभी जारी है।


Tuesday, February 3, 2026

दिल की बात

हमने भरोसा अभी भी कायम रखा है जीने मे,

मगर, ऐ 'परचेत',यह दर्द असहनीय है सीने में।

बड़े ही बुजदिल निकले ये सब, दिल दुखाने वाले,

हमने तो प्यासे को भी पानी पिलाया था, मदीने में।।


नादानी

पता नहीं किसको ढूंढते रहे थे हम, 

सबसे पूछा, डाकिया,धोबी,खलासी, 

सबके सब फ़लसफ़े,इक-इककर खफ़े,

लिए घुमते रहे बनाकर सूरत रुआँसी, 

उम्र गुजरी,तबअहसास हुआ 'परचेत', 

जिंदगी घर में थी, हमने मौत तलाशी।

इश्क़-ए-सर्दी

मांग रही थी वो आज मुझसे 

मेरे प्यार का हलफनामा,

मौर्निग वाक पर जाती है जो

पहनकर, रोज मेरा ही गर्म पजामा।


Monday, February 2, 2026

तमन्ना

तुम्हारे ओठों से चिपककर सांसों के सहारे,

तुमपर ही समर्पित हो जाता,

ऐ काश कि अगर 'परचेत' ! 

मैं तुम्हारे सान्निध्य की कोई बांसुरी होता।

स्वीकारोक्ति

हिम्मत ही नहीं रही जब,

दिखाने को कुछ नया करके,

फायदा ही क्या है 'परचेत',

तब अफसानें बयां करके।




Sunday, February 1, 2026

Imagination

While landing at our courtyard, 

A mysterious bumblebee 

is humming,

It looks,

at our door, 

a treasure trove of happiness 

is coming.

नासमझ

मुहब्बत के खातिर तुम्हारी हर बगावत की,

हमेशा ही अगुवाई करता,

फक़त ख्वाबों में ही मुहब्बत की दुहाई दोगे

तो 'परचेत', अंजाम यही होगा।



Saturday, January 31, 2026

अधूरी हसरत

दिलों की हसरत, मिलन की चाहत, न तो इबादत ही रंग लाई 

और न  ही दिल की दुआ ,

हो जाता मिलन अचानक हमारा भी किसी मोड़ पर 'परचेत,' 

कभी ऐसा इत्तेफाक न हुआ।

Friday, January 30, 2026

दौर-ए-बदलाव

सांझ ढले, मेरे साथ बैठकर 

एक पैग व्हिस्की,

कभी वो संग-सग पीती थी,

जब न तो आभासी दुनिया थी,

और ना ही वो इस कदर ,

अलग ही दुनियां में रहकर जीती थी।

अब उसने व्हिस्की पीना छोड़ दिया है,

आजकल दिन-रात सेल-फोन पीती है।।

Thursday, January 29, 2026

हौंसला

हौसलों के दमपर अभी तक, 

जी है जिंदगी हमने,

डटकर किया है मुकाबला, 

राह की दुश्वारियों का,

हर शै से निकले हैं हम, 

उबरकर भी, उभरकर भी,

जरा भी न कभी बेबस हुए, 

बोझ ढोते लाचारियों का।

Wednesday, January 28, 2026

सवाल

वो लम्हा तुम जरा बताओ,

जब मैं तुम्हारे संग नहीं था,

कौन सा था वो लम्हा-लम्हा

जिसमें, प्यार का रंग नहीं था?


यकीनन

तुम जानते हो कि मेरे होते, 

सलामत है लाज तुम्हारी,

इसीलिए आज तक मैं,

तुम्हारे राज तक नहीं गया ।

मांगने की आदत जिंदगी में 

मुझसे कभी पाली न गई,

मोहब्बत में इसीलिए मैं भरोंसे के 

अल्फ़ाज़ तक नहीं गया ।

Tuesday, January 27, 2026

टीस

साफ-गोई की सजा यह मिली हमको 

कि हम झूठे बन गये,

यही वजह थी कि जहां के आगे ऐ जिंदगी, 

हम अनूठे बन गये।

संतुष्टि


यूं तो इस मेरे किरदार को, 

अंधेरों से हमेशा शिकायत ही रही,

किंतु चलता चला गया, 

नुक़्स भी मिले, दिशा भी मिली।

Monday, January 26, 2026

फलसफा जिंदगी











वो अब आ नहीं सकता फिर से, 

गुज़र गया जो वक्त अपनी राहों से,

किन्तु, मुश्किल तो होगा जिंदगी तेरा 

सुगमता से निकलना, मेरी पनाहों से।

घड़ी की तरह खिसकती जा रही हो, 

पकड़कर रखूंगा तुझे अपनी बांहों से,

सुगम-दुर्गम, हर दौर जिया है तेरे संग,

मुझे फर्क नहीं पड़ता,साहों-सलाहों से।

Sunday, January 25, 2026

राय

वर्तमान  तुम अपना व्यर्थ ही न गंवाना,

उलझकर बातों में किसी भविष्यवेता के,

बहकावे में कभी भी हरगिज़ मत आना,

सड़कछाप, किसी दो कौड़ी के नेता के।

Saturday, January 24, 2026

पल-पल



क्या बताऊं कि ये 

चोंतीस साल कैसे बीते,

किस मुश्किल में 

हर लम्हा गुजरा जीते-जीते,

याद तो होगा तुम्हें कि मैंने 

तुमको भी न्योता दिया था,

जवानी के फोल्डर जब मैंने, 

'बीवी' ऐप डाउनलोड किया था!!

Friday, January 23, 2026

सवाल!

हूं मैं तुम्हारा यार ऐसा ,

कविता का सार जैसा,

प्रेम से गर प्यार ना निभे,

फिर प्यार का इजहार कैसा?



Wednesday, January 21, 2026

एहसास !

थप्पड खाकर वो 'डिस' उनकी

यूं, थोड़ी हमने भी चख दी थी,

बस, ग़लती यही रही हमारी कि

दुखती रग पर उंगली रख दी थी।



Tuesday, January 20, 2026

दानदाता च महीपति;



कडकछाप मुद्रीकृत सारे ब्लौगर-सलौगर, 

यू-ट्यूब पे कमाई की धौंस वाले यूट्यूबर,

आज सबके सब मैंने पशेमान कर दिए,

दस सेंट एडसेंस से मैंने भी कमाए थे,

सारे के सारे गुगल को ही दान कर दिए।🤣


Saturday, January 17, 2026

बहुरूपिये!

अब कहूं भी कैंसे कि तू हिसाब-ए-मुहब्बत, 

किस तरह मुझसे गिन-गिन के लेती थी,

रहती तो हमेशा नज़रों के सामने थी, मगर

जमाने के आगे कुछ कम ही दिखाई देती थी।

दिले नादान



याद तो होगा तुमको 

वो दौर-ए-जवानी,

इक दोराहे पर अचानक 

हम-तुम मिले थे,

जहां सड़क तो 

खाली-खाली थी मगर,

सड़क किनारे कुछ 

चाहत के फूल खिले थे।

शनै:-शनै: जब हमने 

कदम बढ़ाए उसतरफ, 

इधर, इसतरफ 

एक वीरान सा सहरा था, 

उधर एक अशांत  मन 

जमीं पे ठहरा था,

अंततः न तो छांव ही मिल पाई, 

न पानी ही,

ज़ख्म जो तुमने दिया था, 

बहुत गहरा था।


Friday, January 16, 2026

अफसोस।

 दिन-रात हो कि सुबह-शाम बस,

यही अफसोस कचोटता है हाए,

ऐ जिंदगी तुझे हम तमाम उम्र,

बड़े सलीके से नहीं रख पाए।

समझ !

देहिक अपच हो तो खुशी 

एक कब्ज़हर चूर्ण जैसा होता है,

यूं तो समय प्रतूर्ण है मगर,

 हर पल महत्वपूर्ण जैसा होता है।



Tuesday, January 13, 2026

छंद

पर्व लोहड़ी का था

और हम आग देखते रहे,

उद्यान राष्ट्रीय था और

हम बाघ देखते रहे।

ताक में बैठे शिकारी

हिरन-बाज देखते रहे,

हुई बात फसल कटाई की,

हम अनाज देखते रहे।

समझ, नासमझ !

मिले न 'फूल' तो हमने 

'चतुरों' से दोस्ती कर ली,

मजबूरी का नाम गांधी, 

जिंदगी यूं ही बसर कर ली।





Sunday, January 11, 2026

द्वंद्व

उलझकर मेरी बातें कुछ यूं,  

तुम्हारी बातों में रह गई,

दिल की जो भी ख्वाहिशें थी, 

जज्बातों में बह गई।

जिया उलझाने की तुम्हारी 

ये हरकतें बड़ी नासाज़ लगी,

श्रुतिपुट जो सुनना न चाहते थे 

वो तुम्हारी नज़रें कह गई।



Saturday, January 10, 2026

असर

शाम-ओ-सहर,

हमारे मिलने पर,

बीवियों की डपट का

जो रंग  लग गया,

अब क्या बताऊं, 

तुम्हें ऐ दोस्त!

कांच के गिलासों पे भी

जंग लग गया।

Friday, January 9, 2026

खुदानाखास्ता

गैर समझा करते थे जिन्हें हम,

दिल ने उन्हें कुछ इसतरह अपनाया,

दूर भाग खड़ी हुई तन्हाई हमसे,

हम अकेले को जब मिला हमसाया ।


फिर वो हमसाया कुछ यूं हमें भाया,

तमाम जिंदगी की पलट गई काया,

जिन परछाइयों से डरते थे कभी हम,

आखिर,उन्हीं परछाइयों ने हमें अपनाया।

 

Tuesday, January 6, 2026

मुफ्तखोरी

जब भी, जो भी जुबां पे आता है तुम्हारी, बक देते हो, 

मुफ्त में जिसका भी लिखा हुआ मिल जाए पढ़ देते हो, 

फुर्सत मिले तुम्हें तो सोचना, एक कमेंट के भूखें को

क्या, सही में कभी आप उसको उसका हक देते हो?



Thursday, January 1, 2026

आगाज़ - 2026 !


वर्ण आखिरी, वैश्य, क्षत्रिय, विप्र सभी,

सनातनी नववर्ष का जश्न मनाया कभी ?

नहीं, स्व-नवबर्ष के प्रति जब व्यवहार ऐसा,

फिर  पश्चिमी  नवबर्ष  पर तकरार कैसा?


समझ पाओ तो समझ लेना क्षुब्ध भावनाएं,

आपको  नूतनवर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं। 🎂 🙏


बंदिशें ।

मायके ठहरने का वक्त बिटिया जानती है, ज्यादा न रुक पाएगी, हेमंत ऋतु भी आई, कल शिशिर भी वसंत संग चली जाएगी।